जमशेदपुर: जमशेदपुर के मानगो नगर निगम अंतर्गत गोकुलनगर के 350 घरों को वन विभाग द्वारा मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है. नोटिस के संदर्भ में शुक्रवार को जमशेदपुर पूर्वी के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी को ज्ञापन दिया गया. इसमें उपायुक्त द्वारा लोगों को आश्वासन दिया गया कि बहुत ही जल्द इस मामले को गंभीरतापूर्वक देखेंगे. बस्ती वासियों को कहना है कि हम तथा हमारे पूर्वज 40 वर्षों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं. वर्षों के मेहनत और जीवन भर की पूंजी से हमने घर बनाए हैं और यही अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं. गोकुलनगर एक आर्थिक रूप से कमजोर बस्ती है. जहां अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी, रिक्शा चालान, घरेलू कार्य और छोटी-मोटी दुकानों के कार्यों पर निर्भर हैं. वर्तमान में यहां लगभग 350 परिवार निवास करते हैं. हाल ही में वन विभाग द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या बिना परामर्श के घर तोड़ने संबंधित नोटिस जारी कर दिया गया. यह निर्णय न केवल हमारे लिए अत्यंत पीड़ा दायक है. बल्कि
अमानवीय एवं और और असंवैधानिक दृष्टिकोण से भी अनुचित प्रतीत होता है. (नीचे भी पढ़ें)
नोटिस की प्रक्रिया भी ऐसी रखी गयी है ,जिसमें दो और या चार मकानों को ही नोटिस दिया गया है, जिसमें की एक मकान तोड़ भी दिया गया है. अतः बस्ती वासी शुक्रवार को उपायुक्त से ज्ञापन के माध्यम से यह निवेदन करने आए हैं कि उनकी इन मांगों पर ध्यान दिया जाए. उपायुक्त से निवेदन करते हैं कि नोटिस की पुनः समीक्षा की जाए एवं हमें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए. अगर किसी कारणवश विस्थापन आवश्यक हो तो पुनर्वास की समुचित एवं ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. हमारी मांग है कि संयुक्त बैठक स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित कर इस समस्या का समाधान संवेदनशीलता से निकाला जाए. वन विभाग द्वारा अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के बस्ती वासियों को नोटिस देना प्रारंभ कर दिया गया और समय भी मात्र एक हफ्ते का दिया गया. इसमें की घर खाली करना आसंभव है. हम अपनी जान दे देंगे पर घर खाली नहीं करेंगे 40 वर्षों से हम इस जगह निवास कर रहे हैं, जहां बस्ती वासी और इनका परिवार बच्चे , माता-पिता निवास करते हैं.



