जमशेदपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), झारखंड प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग (प्रथम वर्ष) स्थानीय मानगो स्थित आरवीएस इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ. कुल 226 शिक्षार्थी संघ शिक्षा वर्ग में सम्मिलित हुए एवं घोष वर्ग में 72 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण लिया. मुख्य शिक्षक सहित कुल 28 गण शिक्षकों ने वर्ग को संपन्न कराया. वर्ग के समापन अवसर पर आयोजित सार्वजनिक समारोह में शिक्षार्थी स्वयंसेवकों ने 15 दिनों के प्रशिक्षण में अर्जित शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक कौशल का प्रभावी प्रात्यक्षिक प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित नागरिकों ने अत्यंत उत्साह एवं श्रद्धा के साथ देखा. समारोह में वर्ग के सर्वाधिक कार्य महावीर मुंडा, विभाग संचालक इंद्र अग्रवाल, महानगर संघचालक रामचंद्र, वर्गाकार्यवाह विजय उपस्थित थे. मुख्य अतिथि जमशेदपुर रामकृष्ण मिशन के अधीक्षक स्वामी कृष्णप्रेमानंद जी महाराज थे. अपने उदबोधन में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रजागरण के संदेश का स्मरण कराते हुए कहा कि भारत को पुनः विश्व में श्रेष्ठ स्थान पर प्रतिष्ठित करने के लिए प्रत्येक नागरिक में राष्ट्रभक्ति, चरित्र, सेवा और आत्मगौरव का भाव जागृत होना आवश्यक है. (नीचे भी पढ़े)

उन्होंने कहा कि संघ के कार्यक्रम में पहली बार उपस्थित होकर उन्हें स्वयंसेवकों के अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं प्रख्यात उद्योगपति मुरलीधर केडिया ने कहा कि वे स्वयं बाल्यकाल से स्वयंसेवक रहे हैं. उनके जीवन और आचरण में जो भी श्रेष्ठ संस्कार एवं सकारात्मक गुण दिखाई देते हैं, उनका श्रेय संघ की शाखा और स्वयंसेवक जीवन को जाता है. उन्होंने कहा कि वे समाज और अपने परिचितों के बीच स्वयं को स्वयंसेवक कहने में गर्व का अनुभव करते हैं. समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह ने संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, विकास यात्रा और राष्ट्रजीवन में उसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि संघ ने अनेक कठिन परिस्थितियों एवं चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ाई है. पूज्य महात्मा गांधी की हत्या के उपरांत संघ पर लगाया गया प्रतिबंध न्यायालय में असत्य सिद्ध हुआ और संघ पूर्णतः निर्दोष घोषित हुआ. उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान भी संघ एवं स्वयंसेवकों को प्रताड़ित करने का प्रयास हुआ, किंतु लोकतंत्र की रक्षा हेतु हजारों स्वयंसेवक जेल गए और संघर्ष करते रहे.(नीचे भी पढ़े

अंततः लोकतंत्र की विजय हुई और संघ पुनः निर्दोष सिद्ध हुआ. मोहन सिंह ने कहा कि 1992 में अयोध्या स्थित विवादित ढांचे के ध्वंस के पश्चात संघ पर पुनः प्रतिबंध लगाया गया, किंतु न्यायिक प्रक्रिया में संघ निर्दोष सिद्ध हुआ. उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि संघ पर जितने आघात हुए, प्रत्येक बार संघ और अधिक सशक्त होकर समाज के बीच खड़ा हुआ. इसका कारण स्वयंसेवकों का निःस्वार्थ सेवा भाव, श्रेष्ठ आचरण तथा समाज के प्रति समर्पण है. उन्होंने कहा कि आज देशभर में संघ प्रेरित लाखों सेवा कार्य संचालित हो रहे हैं. भूकंप, बाढ़, महामारी, तूफान अथवा किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा के समय स्वयंसेवक बिना किसी भेदभाव के सेवा कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करते. (नीचे भी पढ़े)

अपने उदबोधन में उन्होंने संघ के आगामी शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ समाज जीवन में पांच प्रमुख विषयों सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य तथा स्वदेशी जीवन-दृष्टि-को लेकर व्यापक जनजागरण का अभियान चलाएगा. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विषयों पर समाज में व्यापक जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण निर्मित होगा. अंत में मोहन सिंह ने हिंदू समाज के सभी से आह्वान किया कि वे संघ के कार्य से जुड़ें तथा अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं. उन्होंने कहा कि संगठित, समरस, स्वाभिमानी और संस्कारित समाज ही भारत को परम वैभव के शिखर पर पहुंचा सकता है. समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, स्वयंसेवक, शिक्षार्थी एवं परिवारजन उपस्थित रहे.





