
घाटशिला : कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने इस वर्ष भी आंशिक लॉकडाउन की घोषणा की है. लॉकडाउन होने से राज्य के सभी सरकारी और गैरसरकारी विद्यालय बंद है. विद्यालय में सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है. ऑनलाइन पढ़ाई होने से ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश गरीब परिवार के बच्चों के पास एंड्रॉयड फोन नही है, जिसकारण वे शिक्षा पाने से वंचित हो रहे हैं. बच्चें पढ़ने के लिए अब कुछ भी कर गुजरने की जज्बा देखने को मिल रहा है. आज ऐसा ही कुछ मंजर पूर्वी सिंहभूम जिला के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र जादूगोड़ा से मुसाबनी जाने वाली मुख्य सड़क पर देखने को मिला. सड़क किनारे कुछ बच्चे आम लेकर बेचते देखें गये. सड़क किनारे आम बेच रहे बच्चों से जब पूछा कि आम कैसे दे रहे हो बच्चों ने कहा कि 30रुपए किलो करके दे रहे है. यह जंगल से तोड़कर लाया हूं बहुत ही मीठा है. फिर मैंने पूछा स्कूल में पढ़ते हो उसने कहा हां मैं सरकारी स्कूल में पढ़ता हूं अभी लॉकडाउन के कारण बंद है. फिर मैंने कहा कि अभी तो ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है तुम पढ़ाई क्यों नहीं पढ़ रहे हो तो उसने जवाब में कहा कि यह आम बेचकर ही मैं एक एंड्रॉयड फोन लूंगा जिससे मैं ऑनलाइन क्लास कर सकूंगा.
हम लोग गरीब हैं इसके लिए मोबाइल खरीदने के लिए पैसे नहीं है, इसीलिए रोज में जंगल से आम तोड़कर सड़क किनारे बैठ कर आम बेचता हूं और रोज मुझे लगभग 150 से 200 तक की आमदनी हो जाती है. बच्चों ने कहा कि उनका गांव पास में ही है गांव पहुंचकर छात्र रामू हेम्ब्रम के पिता यशवंत हेम्ब्रम से बात की तो उसने कहा कि हम लोग गरीब हैं थोड़ा बहुत खेत है जो साल भर खाने के लिए बचा के रखे हैं और जंगल से फल आदि लाकर बेचते हैं जिससे हमें आमदनी हो जाती है. बच्चों को तो हम पढ़ाना चाहते हैं परंतु लॉकडाउन के कारण हम यह नहीं कर पा रहे हैं हमारे पास एंड्रॉयड फोन खरीदने के लिए पैसे नहीं है जिससे हम अपने बच्चों को फोन दिला सके. पिता ने कहा हम खुशी से बच्चें को आम बेचने नहीं भेजते हैं, वह अपने आप ही जाता है अब जितना पैसा आम बेचकर रखेगा उसमें और कुछ पैसे जोड़कर मोबाइल फोन खरीदे देंगे ताकि बच्चें की पढ़ाई रुके नहीं और वह पढ़ सके. उसने कहा कि जंगल के फल आदि बेचकर ही अपना परिवार चलाते हैं लेकिन लॉकडाउन होने के कारण यह भी रोजगार छिन गया है अब कोई बाजार आता जाता ही नहीं तो हमारा फल कौन खरीदेगा. कहा कि बच्चें पढ़ने के लिए मजबूरन जंगल से आम तोड़कर सड़क किनारे आम बेचते है ताकि पैसे इकट्ठा कर वह एक फोन ले सके.











