बहरागोड़ा : बहरागोड़ा में बसंत ऋतु आते ही प्रकृति का रूप निखरने लगता है. पेड़ों से पुराने पत्ते झरते हैं और उनकी जगह नए कोमल पत्ते आने लगते हैं. वातावरण में भी ताजगी और बदलाव महसूस किया जा सकता है. बहरागोड़ा प्रखंड के मानुषमुड़िया जाने वाली सड़क किनारे साल के जंगलों में एक अद्भुत कायापलट होती है, जहां पुराने पत्ते झड़ने के बाद डालियों पर ताज़ा, हल्की लाल-भूरी कोपलें और नई पत्तियां आने का सिलसिला शुरू हो जाता है. यह समय पेड़ों में नई ऊर्जा का संचार, फूलों का खिलना और वनों को पुनर्जीवित करने का संकेत देता है. (नीचे भी पढ़ें)
बसंत ऋतु में सरहुल का आगमन साल के पेड़ों पर नए पत्ते और सुगंधित फूल (सखुआ फूल) आने से होता है, जो प्रकृति के यौवन और नई शुरुआत का संकेत देता हैं. यह त्योहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, जो बसंत के आगमन, अच्छी फसल की कामना, प्रकृति पूजा और ग्रामीण भाईचारे का प्रतीक होता है.



