बहरागोड़ा : दालमा की पहाड़ियों में गूंजने वाले ‘विशु शिकार’ के आहट के बीच, बेजुबान वन्यजीवों की रक्षा के लिए बहरागोड़ा चेक नाका अब एक अभेद्य दुर्ग में तब्दील हो गया है. झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के संगम पर स्थित इस रणनीतिक मोड़ पर वन विभाग के अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है, जहां दिन-रात चलने वाले ‘सर्च ऑपरेशन’ के जरिए हर गुजरने वाली गाड़ी की बारीकी से तलाशी ली जा रही है. विभाग का मुख्य लक्ष्य पारंपरिक हथियारों, जैसे तीर-धनुष और जालों की तस्करी को रोकना है, ताकि आस्था की आड़ में वन्यजीवों का रक्त न बहे. (नीचे भी पढ़ें)

प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि परंपरा का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन कानून के उल्लंघन और शिकार की कोशिश पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू रहेगी. इसी क्रम में क्विक रिस्पांस टीम को हाई अलर्ट पर रखा गया है और किसी भी अवैध गतिविधि में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत सीधे जेल भेजने की सख्त चेतावनी दी गई है.



