
जमशेदपुर : लोक आस्था का महापर्व छठ 20 नवंबर को है. वैश्विक महामारी कोरोना के कारण इस साल लगभग सभी पर्व-त्यौहार सीमित दायरों एवं कोविड-19 के मद्देनजर जारी पाबंदियों के साथ मनाये जा रहे हैं, लेकिन नदी-घाटों या जलाशयों के किनारे मनाए जाने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर अब तक सरकार की ओर से कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गयी है. वैसे छठ व्रत के स्थल को लेकर व्रतियों एवं स्वयंसेवी संगठनों में इस साल दुविधा की स्थिति देखी जा रही है. आपको याद दिला दें कि इसी दुविधा और विलंब से सरकारी निर्देश जारी होने के कारण इस साल दुर्गा पूजा को लेकर सरकार और पूजा कमेटियों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. काफी हो-हंगामा भी मचा था. (आगे की खबर नीचे पढ़ें)

वैसे लोक आस्था का महापर्व जो नदी तटों एवं तालाबों के किनारे संपन्न होता है, जिसमें इसकी विशेष महत्ता है. ऐसे में सरकार और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई गाइडलाइन नहीं जारी की गयी है. इसको लेकर छठ व्रतधारियों के बीच चिंता और भी गहरा गई है. लौहनगरी जमशेदपुर में भी लोक आस्था का महापर्व छठ काफी बड़े स्तर पर मनाया जाता है. इसकी तैयारियां स्वयंसेवी एवं सामाजिक संगठन दशहरा के बाद से ही शुरू कर देते हैं. हालांकि एहतियात के तौर पर इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है, लेकिन दुविधा की स्थिति बनी हुई है. शहर की जीवनदायिनी स्वर्णरेखा एवं खरकई नदियों के तटों की साफ- सफाई वैसे तो सरकारी स्तर पर अभी नहीं शुरू कराई गई है, लेकिन तालाबों एवं जलाशयों के आसपास स्वयंसेवी संगठन तैयारी में जुट गए हैं. बहरहाल सरकार और जिला प्रशासन को जल्द ही लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर जरूरी गाइडलाइन जारी करने की जरूरत है. नहीं तो एक बार फिर से इसको लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. वहीं सरकार की ओर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिलने से छठ की तैयारियों में जुटे लोगों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. जबकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.






