जमशेदपुर : सत्यानंद योग केंद्र के तत्वावधान में जमशेदपुर के गोलमुरी क्लब में चल रहे उच्च साधना शिविर के तीसरे दिन आज बिहार स्कूल ऑफ योग के वरिष्ठ संन्यासी स्वामी गोरखनाथ जी के सानिध्य में 80 साधकों ने योग की सूक्ष्म क्रियाओं का अभ्यास किया. व्यावहारिक सत्र में आज त्रिकोणासन के तीन और उत्तानासन के दो प्रकारों के साथ-साथ हलासन, सर्वांगासन, भुजंगासन और अद्धासन का भी गहन अभ्यास कराया गया. प्राणायाम सत्र में भस्त्रिका और नाड़ी शोधन का अभ्यास कराते हुए स्वामी जी ने कहा कि नाड़ी शोधन एक जीवनभर की अनवरत साधना है, जिसमें आगे बढ़ने और उच्च स्तर प्राप्त करने की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं. शिविर में स्वामी जी ने ध्यान के अंतर्गत ‘अजपा-जप’ और ‘स्वर योग’ की प्रामाणिक विधि का अभ्यास कराते हुए बताया कि हमारी स्वाभाविक श्वास के साथ ‘सो’ और प्रश्वास के साथ ‘हम्’ की ध्वनि उत्पन्न होती है. (नीचे भी पढ़ें)

स्थिर होकर नाभि से कंठ तक श्वास-प्रश्वास के साथ ‘सो-हम्’ मंत्र को जोड़ना मन की गहराइयों में उतरने का सबसे सरल माध्यम है. उन्होंने साधकों को निर्देश दिया कि हमें अपनी समस्याओं का ढोल हर जगह नहीं पीटना चाहिए, इससे स्थिति और विकराल हो जाती है. आज लोग मानसिक रूप से इतने कमजोर हो रहे हैं कि दूसरों के कहने पर एक स्वस्थ व्यक्ति भी खुद को बीमार मान लेता है, इसलिए मानसिक सुदृढ़ता अनिवार्य है. कार्यक्रम के अंतिम चरण में, सत्यानंद योग केंद्र के द्वारा निकाले जा रहे मैगजीन के संपादक ने सभी साधकों को फ्री दो महीने की प्रति बांटा और आग्रह किया कि आपके पास यदि कोई विषय हो या फिर कोई प्रश्न हो तो आप इसका समाधान के लिए प्रश्न पूछ सकते हैं. इसके लिए मैगजीन के संपादक अश्विनी शुक्ला से संपर्क कर सकते हैं. इस तीसरे दिन के कार्यक्रम को सफल, अनुशासित और सुव्यवस्थित बनाने में मलय डे, अश्विनी शुक्ला, राज शर्मा, प्रिंस अग्रवाल, बी.एन.पी. गुप्ता, के.टी. भटीना और मनोज झा आदि का विशेष एवं सराहनीय योगदान रहा.







