जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर में अपराधियों द्वारा चाय फेंककर जलाने वाले मामले में टाटा स्टील प्रबंधन ने उदारता दिखायी है. टीएमएच से घायल मेहंदी कुमारी को छुट्टी दे दी गयी है. टीएमएच में इलाजरत मेहंदी कुमारी के बकाया 34,054 रुपये को माफ कर दिया है. टाटा स्टील की ओर से जारी बयान में यह साफ किया गया है कि उनके बिल माफी में किसी भी राजनेता या किसी विधायक या एनजीओ का हाथ नहीं है. कंपनी की ओर से टीएमएच ने बिल को माफ किया है. गौरतलब है कि घटना के बाद जमशेदपुर के कई विधायकों और राजनीतिक नेताओं ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों में मेंहदी कुमारी के इलाज में मदद करने और बिल चुकाने की बात कही थी. उन्होंने बड़ी-बड़ी घोषणाएं कीं, लेकिन वास्तव में किसी भी नेता ने परिवार को एक रुपया भी मदद नहीं दी. टाटा स्टील की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ गरीों की मदद करती है, जबकि कई नेता केवल पब्लिसिटी स्टंट और वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसे मामलों में बयानबाजी करते रहते हैं. यह घटना जमशेदपुर के आम लोगों में टाटा स्टील की छवि को और मजबूत करती है, जो कठिन समय में वास्तविक सहायता पहुंचाने में आगे रहता है. टाटा स्टील की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इलाज का बकाया बिल टाटा स्टील प्रबंधन ने पूरी तरह माफ कर दिया. परिवार की बेहद खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए कंपनी ने यह संवेदनशील फैसला लिया. (नीचे भी पढ़ें)
मेंहदी कुमारी को 6 अप्रैल 2026 को गर्म चाय (स्कैल्ड बर्न) से गंभीर चोट लगी थी. उन्हें टीएमएच के बर्न केयर यूनिट एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया. अस्पताल प्रोटोकॉल के अनुसार उनका पूरा इलाज किया गया और अब वे स्थिर स्थिति में डिस्चार्ज हो चुकी हैं. उनका कुल अस्पताल बिल 61,554 रुपये था. जिसमें परिवार ने 27,500 का भुगतान कर दिया था. बकाया 34,054 रूपए था. परिवार ने आगे कोई भुगतान करने में असमर्थता जताते हुए पूरी तरह समर्पण कर दिया था. मेंहदी कुमारी और उनका परिवार चाय स्टॉल चलाकर गुजारा करता है और निम्न आय वर्ग से ताल्लुक रखता है. टाटा स्टील प्रबंधन ने मरीज की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बकाया राशि पूरी तरह माफ कर दी और उन्हें बिना किसी बकाए के डिस्चार्ज कर दिया. कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस बिल माफी में किसी भी राजनेता, विधायक या एनजीओ का कोई योगदान नहीं है. यह फैसला पूर्ण रूप से टाटा स्टील का अपना संवेदनशील निर्णय है.


