जमशेदपुर : हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. विवाहिताएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं. ज्येष्ठ मास की अमावस्या को होने वाले इस व्रत के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन देवी सावित्री ने अपने तप एवं श्रद्धा के बल पर यमराज से अपने मृत पति, सत्यवान के प्राण वापस लिए थे. तभी से यह व्रत नारी शक्ति के दृढ़ संकल्प, प्रेम और आस्था का प्रतीक बना हुआ है. पर्व को लेकर जमशेदपुर की बाजारों में भी काफी हलचल दिख रही है, जहां व्रत से संबंधित तरह-तरह के रंग-बिरंगे पंखे और टोकरियों से दुकानें सज गई हैं. (नीचे भी पढ़ें)

वट सावित्री व्रत में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं. वे पीले वस्त्र पहन एवं सोलह शृंगार कर व्रत रखती हैं और वटवृक्ष की पूजा कर उसकी परिक्रमा करती हैं. इस पूजा में बांस के बने पंखे एवं डलिया (टोकरी) का खास महत्व होता है, जिनमें पूजा की सामग्रियां, जैसे फल, फूल, मिठाई आदि रखी जाती हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सावित्री अपने पति को बांस के पंखे से हवा करती थीं, जिससे उनका जीवन सुरक्षित रहा. तभी से इस व्रत में बांस के पंखे और डलिया के प्रयोग की परंपरा शुरू हुई. (नीचे भी पढ़ें)

इस वर्ष सोमवार, 25 मई को वट सावित्री व्रत है. इसको लेकर जमशेदपुर के बाजारों में भी इस बार विशेष तैयारियां दिख रही हैं. बाजारों में ग्रामीण शिल्पकारों द्वारा हाथ से बनाए रंग-बिरंगे बांस के पंखे और टोकरियों की खूब बिक्री हो रही है. ये पंखे न केवल पारंपरिक डिज़ाइन में हैं, बल्कि इन्हें आकर्षक रंगों में सजाया भी गया है. इनकी कीमत ₹20 से ₹80 तक है, जिसके विभिन्न आकार और डिजाइनें उपलब्ध हैं. (नीचे भी पढ़ें)

स्थानीय दुकान की संचालिका पूर्णिमा देवी बताती हैं कि इस बार महिलाओं की ओर से रंग-बिरंगे पंखों और सजावटी डलिया की अधिक मांग है. वहीं पूजा के सामान खरीदने आई गुरलीन नामक महिला ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से यह व्रत श्रद्धा से कर रही हैं और इस बार भी विशेष पूजा सामग्री लेने आई हैं.











