
रांची : झारखंड विधानसभा में जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने 2016 में बिल्डर को फोन पर धमकाने और हाजत में बंद करने के मामले को जोरदार तरीके से उठाया है. इस घटना के दौरान पत्रकारों पर भी लाठीचार्ज कर दी गयी थी. इस मसले को भी सरयू राय ने गंभीरता से उठाया है और पुलिस और सरकारी अधिकारियों के क्रियाक्लापों पर ही सवाल उठाया है. दरअसल, अप्रैल 2016 को भालुबासा में भाजपा नेता और बिल्डर निखार सबलोक का प्रोजेक्ट चल रहा था. इसी दौरान वहां भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के विधायक प्रतिनिधि रह चुके पवन अग्रवाल वहां तथाकथित अनियमितता की बात कहते हुए आरोप लगाया था. इसको लेकर निखार सबलोक और पवन अग्रवाल के बीच फोन पर कहासुनी भी हुई थी, जिसमें पवन अग्रवाल ने निखार सबलोक को धमकाया था. वह ऑडियो वायरल हो गया था, जिसके बाद निखार सबलोक ने पवन अग्रवाल के खिलाफ सीतारामडेरा थाना में एफआइआर दर्ज करा दी थी. उस वक्त पवन अग्रवाल सत्ता के साथ थे तो जाहिर सी बात है कि उनकी चलती थी. निखार सबलोक के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा ही दायर कर दिया गया और उसको ही हाजत में बंद कर दिया गया. इस मामले की सूचना के बाद भाजपा के मंत्री सरयू राय खुद सीतारामडेरा थाना पहुंचे थे. सीतारामडेरा थाना में उन्होंने हाजत में बंद करने का कारण पूछा था तो उस वक्त के थानेदार भाग गये थे. इसके बाद हंगामा होने लगा. पत्रकार भी वहां कवरेज के लिए पहुंचे, जहां पत्रकारों पर लाठीचार्ज की गयी थी. इस मामले की जांच के आदेश दिये गये थे और चार पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गयी थी. इसके बाद मामले की जांच होती रही. इस मामले को लेकर जब जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने विधानसभा में सवाल उठाया तो श्री राय को लिखित जवाब दिया गया कि उस वक्त पत्रकारों पर किसी तरह का कोई लाठीचार्ज ही नहीं हुई थी. कुछ उत्पाती लोग आये थे, जिनको थाना से खदेड़ा गया था, जो सरासर गलत है. इस मामले में सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय ने विधानसभा में अपने व्यक्तव्य के दौरान फिर से सवाल उठाये और कहा कि इस तरह के जवाब यह बताता है कि गलत कार्यसंस्कृति अब भी झारखंड में चल रही है. पत्रकारों पर हमला हुआ था और रिपोर्ट दे दी गयी कि कोई लाठीचार्ज नहीं हुई थी. इस मामले में पुलिस ने गलत कार्रवाई की है, जिसको लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए. इस मसले के साथ सरयू राय ने जमशेदपुर के नगर निकायों को ओडीएफ यानी खुले में शौचमुक्त घोषित करने का भी विरोध किया. सरयू राय ने कहा कि अधिकांश शौचालयों में ताले लटके हुए है. ऐसे में कैसे खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया जा रहा है, यह देखने वाली बात होगी. खुले में शौचमुक्त करने के लिए धरातल पर सही व्यवस्था खड़ी करने की जरूरत है.




