
जमशेदपुर : झारखंड के भाजपा की राजनीति में नया मोड़ तब आया, जब करीब 14 साल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में वापसी कर ली और अपनी पूरी टीम के साथ झाविमो का भाजपा में विलय कर दिया. वैसे जमशेदपुर के भाजपा के इतिहास में भी एक नया मोड़ महाशिवरात्रि के दिन यानी शुक्रवार को हुआ जब विलय के बाद पहली बार अभय सिंह खुद पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलने पहुंचे. रघुवर दास से अभय सिंह ने फूल का बुके लेकर मुलाकात की. जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर में जब पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों में लगे थे, तब अभय सिंह फूल का बुके लेकर पहुंचे और रघुवर दास से मिले. उनको फूल का बुके दिया. करीब आधे घंटे तक दोनों के बीच बातचीत हुई. इन लोगों ने सूर्य मंदिर का भ्रमण भी किया और फिर वहां से निकल गये. यह कोई सामान्य घटना जमशेदपुर की राजनीति के लिए नहीं है. सामान्य घटना इसलिए नहीं है क्योंकि भाजपा में रहते हुए रघुवर दास और अभय सिंह के बीच काफी लंबी और पुरानी दुश्मनी चलती रही थी. ऐसा कभी नहीं हुआ था कि कभी रघुवर दास अभय सिंह के पास आये हो या फिर अभय सिंह कभी रघुवर दास के पास गये हो. लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है और वर्षों पुरानी यह दुश्मनी शुक्रवार को दोस्ती में तब्दील होती नजर आयी. सूर्य मंदिर में दोनों के बीच घनिष्टता के साथ मुलाकात हुई. अभय सिंह के पिता ठाकुर धुरंधर सिंह के साथ भी रघुवर दास की कभी नहीं बनी थी, जो बाद में बेटे दिलीप सिंह, अभय सिंह और निर्भय सिंह के साथ बरकरार रही थी. जब जमशेदपुर पूर्वी से पहली बार विधायक बनकर रघुवर दास आये थे, तब अभय सिंह और निर्भय सिंह के लोगों ने रघुवर दास को भालुबासा चौक पर पिटाई तक कर दी थी, जिसको लेकर जमकर बवाल हुआ था और रघुवर दास के खेमे ने भी अभय सिंह गुट पर हमला बोल दिया था. उसके बाद यह खाई और बढ़ती चली गयी. जब प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर रघुवर दास को भाजपा में जगह दी गयी, तब रघुवर दास ने यह बदला साधा था और अभय सिंह समेत कई लोगों को भाजपा से बाहर का रास्ता दिखाते हुए बरखास्त कर दिया था, जिसके बाद झाविमो का गठन हो गया था.

अभय सिंह इसके बाद से लगातार रघुवर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्वी से चुनाव लड़ते रहे, यह अलग बात रही कि अभय सिंह कभी जीत नहीं पाये और हमेशा रघुवर दास ही जीतते रहे. लेकिन अभय सिंह तब भी नहीं माने और रघुवर दास भी लगातार अभय सिंह के खिलाफ काम करने से कभी नहीं चुके. जब मुख्यमंत्री बनकर रघुवर दास एक बार काशीडीह गये थे, तब मुख्यमंत्री से किसी ने शिकायत कर दी कि दिलीप सिंह, अभय सिंह और निर्भय सिंह द्वारा वहां जमीन का अतिक्रमण किया जा रहा है और एक हाइमास्ट लाइट तक नहीं लगाने दिया जा रहा है, तब मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद उपायुक्त को कहकर अभय सिंह से जुड़ी पूरी संपत्ति और स्कूल की मापी करा दी थी और काशीडीह स्कूल के मैदान पर हाइमास्ट लाइट लगवा ही दिया था. लेकिन राजनीति में हालात बदले और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भाजपा में शामिल हो गये. इस बीच मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ सरयू राय ने ताल ठोंकी, तब सरयू राय के लोगों ने अभय सिंह से कहा था कि वे इस बार जमशेदपुर पूर्वी से चुनाव नहीं लड़े, सरयू राय का समर्थन में बैठ जाये, लेकिन अभय सिंह नहीं माने और चुनाव लड़ गये, लेकिन जीत सरयू राय की हुई. रघुवर दास के साथ सरयू राय की पहले से ही अनबन थी और बाद में चलकर अभय सिंह की भी सरयू राय के साथ अनबन हो गयी, जिसके बाद रघुवर दास और अभय सिंह हालात को देखते हुए एकजुट हो गये और आज दोनों भाजपा में एक साथ हो चुके है.

चंद्रशेखर मिश्रा और भरत सिंह ने निभायी गांठ खोलने की अहम भूमिका
भाजपा में शामिल होने के बाद अभय सिंह और रघुवर दास के बीच दोस्ती कराने में कई लोगों ने अहम भूमिका निभायी. पहले से ही भाजपा में शामिल हो चुके भरत सिंह ने इस मामले में अहम भूमिका निभायी. भरत सिंह अभय सिंह के रिश्ते में भाई भी है. इसके अलावा भाजपा नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर मिश्रा ने भी दोनों के बीच दोस्ती कराने में अहम भूमिका निभायी. इसका परिणाम हुआ कि आज पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अभय सिंह एक साथ हो गये है और दोनों के बीच की यह दोस्ती नयी राजनीति का संकेत है.






