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Jharkhand bjp leader Babulal Marandi attack on Hemant government : एमएमडीआर एक्ट पर बाबूलाल मरांडी का झामुमो-कांग्रेस सरकार पर हमला, बोले- झारखंड सरकार की नीतियों से उद्योग और रोजगार पर पड़ रहा प्रतिकूल असर, अपनी नाकामी छिपाने के लिए जनता को गुमराह कर रही राज्य सरकार

Jharkhand bjp leader Babulal Marandi attack on Hemant government : एमएमडीआर एक्ट पर बाबूलाल मरांडी का झामुमो-कांग्रेस सरकार पर हमला, बोले- झारखंड सरकार की नीतियों से उद्योग और रोजगार पर पड़ रहा प्रतिकूल असर, अपनी नाकामी छिपाने के लिए जनता को गुमराह कर रही राज्य सरकार
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जमशेदपुर : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एमएमडीआर एक्ट को लेकर झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला. बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के प्रयाग कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने एमएमडीआर एक्ट के प्रावधानों, खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, झारखंड में खनिज आधारित उद्योगों की स्थिति तथा राज्य सरकार की नीतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की सरकार एमएमडीआर एक्ट को लेकर जनता को भ्रमित कर रही है और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है. संवाददाता सम्मेलन में झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह, भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा एवं जिला मीडिया प्रभारी प्रेम कुमार झा भी मौजूद रहे. संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एमएमडीआर एक्ट संसद से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन चुका है. यह कानून केवल झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू है. उन्होंने कहा कि झारखंड में जो प्रावधान लागू होंगे, वही ओडिशा, छत्तीसगढ़ और देश के अन्य राज्यों में भी लागू होंगे. ऐसे में झामुमो और कांग्रेस द्वारा इसे केवल झारखंड के खिलाफ उठाए गए किसी कदम के रूप में प्रस्तुत करना वास्तविकता से परे है. उन्होंने कहा कि कानून में मुख्य रूप से मेजर मिनरल्स पर राज्य सरकारों द्वारा मनमाने तरीके से अतिरिक्त सेस या टैक्स लगाए जाने के संबंध में प्रावधान किया गया है, जबकि लघु खनिजों को इससे बाहर रखा गया है. लघु खनिजों पर राज्य सरकारों के अधिकार पूर्ववत हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड के संदर्भ में कोयला और आयरन ओर जैसे प्रमुख खनिजों पर लगाए गए अतिरिक्त कर का सीधा प्रभाव उद्योगों की लागत और प्रतिस्पर्धा पर पड़ता है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार ने कोयले पर प्रति टन 450 रुपये अतिरिक्त कर लगाया है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 30 टन कोयला एक हाइवा या ट्रक में जाता है, तो केवल अतिरिक्त कर के रूप में 13,500 रुपये देने पड़ते हैं. इसी प्रकार आयरन ओर पर प्रति टन 600 रुपये अतिरिक्त कर के कारण 30 टन की एक खेप पर 18,000 रुपये अतिरिक्त भार पड़ता है. उन्होंने कहा कि जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में इसका असर आसानी से समझा जा सकता है, क्योंकि स्टील उद्योग में कोयला और आयरन ओर दोनों प्रमुख कच्चे माल हैं. उन्होंने कहा कि जब झारखंड में खनिज दूसरे राज्यों की तुलना में महंगे होंगे, तो उद्योग दूसरे राज्यों से कोयला और आयरन ओर खरीदने को मजबूर होंगे। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ अथवा अन्य राज्यों से सस्ता खनिज मिलने पर उद्योग वहीं से खरीद करेंगे. इसका प्रत्यक्ष प्रभाव झारखंड के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग प्रभावित होंगे तो उत्पादन और रोजगार पर भी असर पड़ेगा. श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि पिछले करीब साढ़े छह वर्षों में राज्य में कोई नया बड़ा कल-कारखाना लगाने के बजाय पहले से स्थापित उद्योगों के सामने भी कठिनाइयां खड़ी की जा रही हैं. (नीचे भी पढ़ें)

राज्यों को खनिज राजस्व में बढ़ी हिस्सेदारी का दिया आंकड़ा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व के बंटवारे का आंकड़ा रखते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 से पहले राज्यों को केंद्र से खनिजों से प्राप्त राजस्व का 60.24 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जबकि केंद्र के पास 39.76 प्रतिशत रहता था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनने के बाद राज्यों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई गई और वर्ष 2025-26 तक राज्यों का हिस्सा बढ़कर 88.53 प्रतिशत हो गया, जबकि केंद्र का हिस्सा 11.47 प्रतिशत रह गया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में देशभर के राज्यों को खनिजों से करीब 25,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 तक यह राशि बढ़कर 1,14,549 करोड़ रुपये हो गई. उन्होंने इसे राज्यों को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की नीति का उदाहरण बताया. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केंद्र सरकार ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जिला खनिज फंड (डीएमएफटी) की व्यवस्था भी की. उनके अनुसार, पिछले दस वर्षों में झारखंड को डीएमएफ के माध्यम से 19,000 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि खनिज संपदा वाले राज्यों को अधिकाधिक राजस्व और खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं. उन्होंने खनिज खदानों की नीलामी का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2015 के बाद खदानों की पारदर्शी नीलामी की व्यवस्था लागू हुई. उनके अनुसार, नीलामी के बाद राज्यों को रॉयल्टी के रूप में करीब 2.32 लाख करोड़ रुपये और नीलामी प्रीमियम के रूप में करीब 96,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. (नीचे भी पढ़ें)

झारखंड में खदानों की नीलामी नहीं होने पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में बड़ी मात्रा में खनिज संपदा होने के बावजूद राज्य सरकार इसका समुचित उपयोग नहीं कर पा रही है. उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब छह वर्षों में राज्य सरकार आयरन ओर और कोयला खदानों को लेकर अपेक्षित स्तर पर नीलामी अथवा संचालन शुरू नहीं करा सकी. उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में आयरन ओर की कई खदानें बंद पड़ी हैं. इसके कारण स्थानीय बाजार और रोजगार प्रभावित हुए हैं तथा लोगों को मजदूरी एवं रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है. इसके विपरीत, उन्होंने पड़ोसी ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनन गतिविधियों के कारण आर्थिक गतिविधियों में तेजी दिखाई देती है. श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में खनिज का संचित भंडार देश के कुल भंडार का करीब 40 प्रतिशत बताया जाता है, लेकिन इसके बावजूद राज्य की आर्थिक स्थिति और खनन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. उन्होंने पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 74 खदानों की नीलामी की गई, जिनमें से 35 खदानों में काम भी शुरू हो चुका है. वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक केवल प्रीमियम के रूप में ओडिशा सरकार को करीब 87,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि यदि झारखंड में भी समय पर आयरन ओर की खदानों की नीलामी की गई होती, तो राज्य सरकार के खजाने में बड़ी राशि आती और खनन क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़तीं. (नीचे भी पढ़ें)

अवैध खनन और परिवहन को लेकर लगाए गंभीर आरोप
संवाददाता सम्मेलन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में अवैध कोयला खनन, आयरन ओर के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में अवैध कोयला उत्खनन एवं परिवहन की गतिविधियां चल रही हैं. उन्होंने सारंडा क्षेत्र में भी अवैध आयरन ओर उत्खनन और उसके परिवहन का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में संचालित कुछ स्पंज आयरन इकाइयों के संचालकों की शिकायत है कि उन्हें वैध स्रोत से खनिज उपलब्ध नहीं हो पाता और उन्हें अवैध माध्यम से खनिज खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि इस पूरी व्यवस्था से अवैध आर्थिक लाभ हो रहा है और इसी कारण खदानों की पारदर्शी नीलामी तथा वैध खनन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन और परिवहन से होने वाला आर्थिक लाभ सत्ता से जुड़े लोगों तक पहुंच रहा है. हालांकि, ये आरोप उन्होंने राजनीतिक तौर पर लगाए और उनके समर्थन में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कोई स्वतंत्र दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया. (नीचे भी पढ़ें)

राज्य सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए कर रही राजनीति
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाने के बजाय यह बताना चाहिए कि राज्य में खनिज संपदा का इस्तेमाल कर रोजगार और राजस्व बढ़ाने के लिए उसने पिछले वर्षों में क्या कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व बंटवारे के आंकड़े बताते हैं कि खनिज संपदा वाले राज्यों को पहले की तुलना में अधिक संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि एमएमडीआर एक्ट पूरे देश में समान रूप से लागू है और इसका उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन तथा राज्यों को मिलने वाले राजस्व की व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना है. उन्होंने झामुमो-कांग्रेस पर इस कानून को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय झारखंड के उद्योग, रोजगार और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. संवाददाता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों ने मेजर मिनरल्स पर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकार तथा खदानों की नीलामी से जुड़े सवाल भी पूछे. इस पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिन खदानों के पुराने लीज समाप्त हो चुके हैं, उन्हें नियमों के अनुसार नीलामी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में नीलामी नहीं होने के कारण खनन गतिविधियां लंबे समय से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड के पास प्रचुर खनिज संपदा है, लेकिन यदि उसका पारदर्शी और नियमसम्मत तरीके से उपयोग नहीं किया गया तो खनिज संपदा के बावजूद राज्य को अपेक्षित आर्थिक लाभ और रोजगार नहीं मिल पाएगा. उन्होंने राज्य सरकार से खदानों की नीलामी, वैध खनन को बढ़ावा देने और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की.

Team Sharp Bharat A

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