अनिल कुमार/बोकारो : जब किसी गरीब की जमीन-जायदाद पर कोई कब्जा करना चाहता है तो वह प्रशासन के पास फरियाद करने जाता है, लेकिन जब प्रशासन ही किसी गरीब की संपत्ति हड़पने की कोशिश करे तो वह कहां जाये! ऐसा ही एक मामला बोकारो जिले का एक आदिम बिरहोर जाति का परिवार उपायुक्त के पास लेकर पहुंचा है और उनसे इंसाफ दिलाने की गुहार लगायी है. अब देखना है कि उसे कब तक और कैसा इंसाफ मिलता है. (नीचे भी पढ़ें)
बोकारो जिले के गोमिया स्थित तुलबुल गांव निवासी बिरहोर आदिम जनजाति के बाबू चंद की पत्नी सावित्री देवी सपरिवार न्ययाय की गुहार लगाने उपायुक्त कार्यालय पहुंची. उसने उपायुक्त के समक्ष अपनी फरियाद सुनाया कि कई साल पहले धौड़ा गांव में रमेश बेसरा नाम के शिक्षक ने उनसे कहा कि वे अपनी कुछ जमीन उन्हें दें जिसमें वे बच्चों को पढ़ायेंगे एवं उक्त जमीन पर दो कमरे बनवा देंगे. शिक्षक ने उनसे कहा कि उनके मरने के बाद वे दोनों कमरे उनके हो जायेंगे. इसके बाद उन लोगों ने जमीन दे दी जिस पर दो कमरे बनाकर वे बच्चों को पढ़ाते रहे. दो वर्ष पूर्व उन शिक्षककी मृत्यु हो गयी, जिसके बाद वे लोग उस कमरे को अपना मानते हुए उसमें ताला लगाकर रखे हुए थे. (नीचे भी पढ़ें)
लेकिन विगत 6 जनवरी को अचानक गोमिया के बीडीओ कपिल कुमार उनके घर आकर कमरों की चाबी मांगने लगे. नहीं देने पर उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग किया एवं मारपीट भी की. बात यहीं खत्म नहीं हुई, वे दोबारा पुलिस के साथ पहुंचे एवं कमरों का ताला तोड़ने लगे. उनके पूछने पर कि ये क्या हो रहा है, बीडीओ ने उन पर सरकारी स्कूल में ताला लगाने का आरोप लगाया. इस पर जब उन्होंने पुराने शिक्षक से हुई बात बताई तो बीडीओ ने उसके सरकारी स्कूल होने का दावा किया. उसके यह कहने पर कि जमीन उनकी है और उहोंने जमीन स्कूल के लिए दान नहीं की है और न ही उन्हें जमीन का मुआवजा मिला है, जमीन के सारे कागजात भी उनके पास है, बीडीओ उनसे मारपीट को उतारू हो गये एवं उसके बेटे का मोबाइल फोन भी छीन लिया एवं पूरी भीड़ के सामने उनकी बेइज्जती भी की. फिर 7 जनवरी को उन्हें गोमिया पुलिस की गाड़ी में बैठाकर थाना ले जाया गया जहां उन्हें दिन भर बैठाकर रखा गया. शाम 4 बजे पहुंचे बीडीओ ने फिर वही बातें दोहरानी शुरू की, जिस पर उन्होंने सोचने के लिए मोहलत मांगी तब उन्हें थाना से छोड़ा गया. उसने बताया कि गांव के वर्तमान शिक्षक दिनेश प्रजापति भी उन्हें गुंडे भेज कर धमकाने की कोशिश की, क्योंकि उन्हें ही गांव में पढ़ाने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है. उसने उपायुक्त से इस मामले में न्याय दिलाने की गुहार लगाई है.



