रांची: झारखंड विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम में अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद किया. उन्होंने कहा कि इसी सदन से नियोजन नीति पारित हुई थी और अब दो दिन पहले सरकार ने कैबिनेट से नई नियोजन नीति को मंजूरी दी. जो विधेयक सदन से पारित हो गया उसे बिना वापस लिए फिर से कैबिनेट से पारित कराना न्यायसंगत नहीं है. उन्होनें कहा कि सरकार सदन का अवमानना कर रही है. सत्र में सरकार ने 1932 आधारित नियोजन नीति पारित कराई.
भाजपा विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने भी सरकार पर सदन की अवमानना करने का आरोप लगाया. उन्होनें कहा कि इसी सदन से सर्वसम्मति से नियोजन नीति पारित हुई है. (नीचे भी पढ़े)
इस समय 1932 आधारित स्थानीय नीति पारित की गई थी. अभी जो कैबिनेट आए नियोजन नीति आयी है वह 2016 वाली नीति है. कहा कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि 1932 पर सरकार क्यों बैकफुट पर आई. यह झारखंड के लोगों के साथ धोखा है. उन्होनें कहा कि नियोजन नीति पर हाई कोर्ट ने क्या निर्णय दिया है यह सरकार को सदन में बताना चाहिये. पिछले दरवाजे से सरकार ने नई नियोजन नीति को मंजूरी दी है. यह सदन का अवमानना है. पहले नियोजन नीति पर चर्चा होनी चाहिए. इसके बाद विपक्ष के विधायकों ने वेल में आकर हंगामा शुरू किया. (नीचे भी पढ़े)
विपक्ष के हंगामे के कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 12 बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दिया.संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि किस कारण से हाई कोर्ट ने नियोजन नीति को रद्द किया है यह सभी सदस्य जानते हैं. यह सही है कि नियोजन नीति को कैबिनेट से पारित कराया गया है. कहा कि सरकार 13 मार्च को इस मामले पर सदन में जवाब देगी की किस कारण से नियोजन नीति पारित हुआ और किस कारण से रद्द हुआ.



