रांची : झारखंड की राजधानी रांची में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी गयी है. पहले धारा 163 को धारा 144 जाना जाता था. अभी नये भारतीय कानून के मुताबिक, इसकी धारा 163 हो चुकी है. इस निषेधाज्ञा को पूरी राजधानी जिले में 6 मई की सुबह 10 बजे से 4 जून या अगले आदेश तक के लिए लगाया गया है. कुल 60 दिनों के लिए अभी लगाया गया है, लेकिन इसमें यह भी दिया गया है कि अगले आदेश तक यह निषेधाज्ञा लागू रहेगी. एसडीओ की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रशासन को प्राप्त सूचनानुसार कतिपय संगठनों, दलों द्वारा धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली इत्यादि किए जाने की सूचना है. हाल के दिनों में पूर्व में निर्धारित स्थान जाकिर हुसैन पार्क की जगह यह कार्यक्रम राजभवन मुख्य द्वार, मुख्यमंत्री आवास, कांके रोड पर भी हो रहे हैं. इस प्रकार के कार्यक्रमों से सरकारी काम-काज में व्यवधान उत्पन्न होने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था बाधित होने एवं विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने तथा लोक परिशांति भंग होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. इसको रांची सदर के एसडीओ (अनुमंडल दण्डाधिकारी) उत्कर्ष कुमार द्वारा बीएनएस की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए रांची सदर अनुमंडल अंतर्गत कई जगहों पर निम्न प्रकार की निषेधाज्ञा जारी किया गया. (नीचे भी पढ़ें)
इसके तहत मुख्यमंत्री आवास कांके रोड के चाहरदीवारी से 100 मीटर की परिधि में, राजभवन के चाहरदीवारी से 100 मीटर की परिधि में (जाकिर हुसैन पार्क को छोड़ कर), झारखण्ड उच्च न्यायालय के चाहरदीवारी से 100 मीटर की परिधि में, नये विधानसभा के चाहरदीवारी से 500 मीटर की परिधि में, प्रोजेक्ट भवन, नेपाल हाउस, भवन के 100 मीटर की परिधि में, प्रोजेक्ट भवन, एचइसी धुर्वा, भवन के 200 मीटर की परिधि में लगाया गया है. इसके तहत बिना सक्षम प्राधिकार के पुर्वानुमति के किसी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली या आमसभा का आयोजन करना, सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों व कर्मचारियों एवं न्यायालय कार्य एवं धार्मिक तथा अंत्येष्टि कार्यक्रम को छोड़कर), किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, पिस्टल, बम, बारूद आदि लेकर निकलना या चलना, (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों व कर्मचारियों को छोड़कर), किसी प्रकार के हरवे हथियार जैसे लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर निकलना या चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों या कर्मचारियों को छोड़कर), बिना सक्षम प्राधिकार के पुर्वानुमति के किसी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना, (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों व कर्मचारियों को छोड़कर) पर पाबंदी होगी. यह आदेश किसी भी सरकारी पदाधिकारी अथवा बल पर लागू नहीं होगा.



