रांची: जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर सीआईडी की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. मामले में दोनों पक्षों की ओर से सुनवाई पूरी हो गई. इसके बाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. कोर्ट इस पर 5 सितंबर को फैसला सुनाएगा. याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा गया, उनकी ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है, छापेमारी में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. उनकी गिरफ्तारी अवैध हैं.वहीं सीआईडी की ओर से बताया गया टीडीपीएल को परीक्षा आयोजन का कार्य देने में उनकी भूमिका रही हैं. टीडीपीएल की ओर से ली जाने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, इसकी पूरी जानकारी उन्हें थी, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया गया. पिछली सुनवाई में सीआईडी की ओर से कोर्ट में केस डायरी पेश किया गया था. (नीचे भी पढ़े)
ख्यांग्ते की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने पक्ष रखा.बता दें कि सीआईडी ने एल ख्यांग्ते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था. जांच में एल ख्यांग्ते पर टीडीपीएल से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपए कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है. बताते चलें कि सीआईडी ने परीक्षा में अनियमितता को लेकर कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है. इसी मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने एल ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ हुई थी, उसके बाद से वे जेल में बंद हैं. इस केस में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जेपीएससी नियुक्ति घोटाले के किंगपिन अभय तिवारी ने जो स्वीकारोक्ति बयान सीआईडी के अधिकारियों के समक्ष दिया है, उसमें उसने पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते का घोटाले में शामिल होने का उल्लेख किया है. साथ ही कहा है कि टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने की एजेंसी के रूप में चयन करने में ख्यांग्ते की अहम भूमिका है.




