
रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि झारखंड का इंडस्ट्रियल पॉलिसी से राज्य का विकास हो सकेगा. लोगों को रोजगार मिलेगा और निवेश हो सकेगा. राज्य के औद्योगिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसको मंजूरी दी गयी है. हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य का विकास होगा और इसके लिए नयी पॉलिसी लायी गयी है. वहीं, उन्होंने कहा कि नये राज्यपाल का मनोनयन किया गया है. राज्यपाल आयेंगे तो विकास में वे सहायक साबित होंगे, उनका स्वागत है. (नीचे देखे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान का-video)
दूसरी ओर, राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में हुई मौत पर आपत्ति दर्ज कराते हुए राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष सोनिया गांधी, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, टीएमसी की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगोड़ा, जेकेपीए के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला, राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वरी यादव, सीपीआइएम के सीताराम येचुरी, सीपीआइ के डी राजा ने हस्ताक्षर किये है. पत्र में फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में मौत को अत्यंत दुखद बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. पत्र में जिक्र है कि 84 वर्षीय जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाले फादर स्टेन स्वामी को पिछले वर्ष अक्टूबर में भीमा कोरेगांव मामले का आरोपी बताते हुए कठोर यूएपीए कानून के तहत हिरासत में लिया गया था. पार्किंसंस समेत अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे फादर स्टेन स्वामी को इलाज देने से इंकार किया गया. तरल लेने के लिए उन्हें सिपर मुहैया कराने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाना पड़ा. कोरोना संक्रमितों से भरे तलोजा जेल से उन्हें हटाने के लिए व्यापक तौर पर अपील का भी असर नहीं पड़ा. उनकी जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया गया. बंबई हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. कोरोना संक्रमित होने के बाद उनकी स्थिति बिगड़ती चली गयी. नेताओं ने मांग की है कि उनके खिलाफ लगाए गए फर्जी आरोपों के मद्देनजर राष्ट्रपति तत्काल हस्तक्षेप करें और गलत मुकदमे लादने वालों को चिन्हित किया जाए. भीमा कोरेगांव मामला समेत वैसे तमाम मामलों में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए, जिनपर राजनीतिक हित साधने के उद्देश्य से कठोर कानूनों के तहत मुकदमे किए गए हैं.





