जमशेदपुर : झारखंड सशस्त्र पुलिस बल रांची के डीआइजी और कोल्हान के पूर्व डीआइजी राजीव रंजन सिंह सोमवार 31 जनवरी को रिटायर कर गये. मूलत: झारखंड के पलामू के रहने वाले राजीव रंजन ने करीब 28 साल तक पहले एकीकृक बिहार और फिर झारखंड में कई पदों को सुशोभित करने वाले राजीव रंजन सिंह ने गौरवपूर्ण कार्यकाल अपना समाप्त किया और अंतिम दिन वे अपने कार्यालय गये. अपने साथियों से मिले और फिर सबके प्रति अपना आभार जताया. आंतरिक सुरक्षा पदक, झारखंड राज्य सराहनीय सेवा पदक, राष्ट्रपति सराहनीय पदक और राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित डीआइजी राजीव रंजन सिंह झारखंड सशस्त्र पुलिस बल रांची के डीआइजी के पद से पहले कई पदों पर रहे है. वे अपने कॉलेज के दिनों के बाद जेजे कॉलेज झुमरी तिलैया में व्याख्यता (लेकचरर) बने. वहां वे 1986 से 1990 तक लेक्चरर के तौर पर काम किये. इस बीच वे राज्य के सरकारी सेवाओं के लिए तैयारी करते रहे. इसके बाद वे मध्य प्रदेश कैडर में डिप्टी कलेक्टर बन गये. इसके बाद वे बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन (बीपीएससी) की परीक्षा निकाली. 1994 में वे चयन होने के बाद ट्रेनिंग के बाद 1996 से 1997 तक बिहार में वैशाली जिले के हाजीपुर एरिया के डीएसपी बने. इसके बाद वे सर्वाधिक डिस्टर्ब माने जाने वाले बिहार के जहानाबाद में 1997 से 1999 तक डीएसपी रहे. फिर बिहार में ही शेरघाटी गया में वर्ष 2000 से 2003 तक डीएसपी रहे. फिर चार साल तक जमशेदपुर के हेडक्वार्टर और सिटी डीएसपी के पद को संभाला. 2007 से 2009 में चतरा मुख्यालय डीएसपी रहे. झारखंड कैडर लेने वाले राजीव रंजन सिंह 2009 से 2011 में डीएसपी हटिया, फिर एएसपी जमशेदपुर के तौर पर वर्ष 2011 से 2012 तक रहे. फिर ग्रामीण एसपी जमशेदपुर के तौर पर 2012 से 2013 तक रहे. फिर डीएसपी यातायात रांची के साथ साथ ग्रामीण पुलिस अधीक्षक रांची और नगर पुलिस अधीक्षक रांची के प्रभारी में वर्ष 2013 से 2014 तक रहे. बाद में वे सिमडेगा के एसपी के तौर पर 2014 से 2017 तक, फिर गोड्डा एसपी के तौर पर 2017 से 2018 तक, फिर झारखंड जगुआर के एसपी के तौर पर 2019 में छह माह के लिए रहे. इसके बाद वे एसपी पाकुड़ हुए. इसके बाद उनको प्रोमोशन देकर कोल्हान का डीआइजी बनाया गया, जिसमें वे वर्ष 2020 से 11 जुलाई 2021 तक डीआइजी के पद पर रहे. इसके बाद 12 जुलाई 2021 से लेकर 31 जनवरी 2022 तक रांची के झारखंड सशस्त्र पुलिस के डीआइजी रहे. (नीचे पढ़े अखिलेश गैंग की कैसे बन गये थे परेशानी का कारण)

जमशेदपुर में अखिलेश गैंग पर कसी थी नकेल, चार लोगों के इनकाउंटर के बाद दहशत था डीएसपी से डीआइजी बने राजीव का
वैसे तो वे एक तेज-तर्रार ऑफिसर के तौर पर जाने जाते रहे है, लेकिन राजीव रंजन सिंह डीआइजी से ज्यादा नाम जमशेदपुर के एसपी के तौर पर नाम कमाये. हेडक्वार्टर डीएसपी जमशेदपुर या फिर सिटी डीएसपी जमशेदपुर के पद पर अपराधियों में खौफ था. वे जमशेदपुर में चार साल तक 2003 से 2007 तक रहे थे. इस दौरान अखिलेश सिंह गैंग का आतंक था और उस वक्त उन्होंने इस गैंग को शांत ही कर दिया. चार लोग इनकाउंटर में सोनारी दोमुहानी में मारे गये थे. उस मामले में झारखंड हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग से लेकर हर जगह उनको घसीटा गया, लेकिन सरकार के सहयोग से वे लड़ाई लड़ते रहे और अंतत: उनको जीत हुई.






