
गणेश महाली. 
चंपई सोरेन.
सरायकेला : सरायकेला विधानसभा सीट के लिए नामांकन समाप्त होते ही अब प्रत्याशियों का शक्ति प्रदर्शन और जोर आजमाइश शुरू हो गया है. वैसे बीते 19 सालों से सरायकेला विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत नसीब नहीं हुई है. यहां से अंतिम बार भाजपा के टिकट पर अनंतराम टुडू ने जीत दर्ज की हैं. हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा का यह पारंपरिक सीट रहा है और यहां से लगातार सात बार झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री चंपई सोरेन जीतते रहे हैं. वैसे पिछली बार 2014 के विधानसभा चुनाव में गणेश महाली और चंपई सोरेन के बीच काफी नजदीकी मुकाबला हुआ था जिसमें करीब साढे ग्यारह सौ मतों से गणेश महाली चुनाव हार गए थे. हालांकि गणेश महाली ने बीते 5 साल सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे और यही कारण है कि नहीं चाहते हुए भी रघुवर दास ने सरायकेला से अंतिम समय में गणेश महाली को टिकट देने पर अपनी मुहर लगा दी. आपको बता दें कि गणेश महाली और अनंतराम टुडू दोनों ही भाजपा के टिकट के दावेदारों में शामिल थे, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने गणेश महाली पर भरोसा जताया और उन्हें टिकट दे दिया. वैसे सरायकेला सीट पर मुकाबला अब दिलचस्प और रोचक हो गया है जहां टिकट नहीं मिलने से नाराज अनंतराम टुडू ने आजसू का दामन थाम लिया और आजसू के टिकट से नामांकन दाखिल करने के बाद चुनावी समर में कूद पड़े हैं. सरायकेला विधानसभा सीट पर राजनगर के मतदाता ही हार जीत का मुहर लगाते हैं, और यही कारण है कि चंपई सोरेन को हर बार जीत नसीब हुई है. चूंकि राजनगर संथाल बहुल इलाका है जहां एक छत्र राज चंपई सोरेन का माना जाता है. पिछली बार जब अनंतराम टूटू यहां से प्रत्याशी थे तो संथाल वोट में बंटवारा हुआ था जिससे चंपई सोरेन चुनाव हार गए थे. लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव में संथाल प्रत्याशी नहीं होने का खामियाजा भाजपा उठा चुकी है जहां गणेश महाली को हार का मुंह देखना पड़ा था, लेकिन इस बार चुकी भाजपा से बगावत कर अनंतराम टूडू आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तो ऐसे में एक बार फिर से चंपई सोरेन का पलड़ा भारी हो गया है. क्योंकि अनंतराम टूडू भाजपा के लिए ही सिरदर्द बनने जा रहे हैं. हालांकि अनंतराम टुडू को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि अनंतराम टुडू आरएसएस के कर रहे हैं ऐसे में अगर आरएसएस का कैडर वोट उन्हें पड़ गया तो वे बाजी मार भी सकते हैं. वैसे टिकट को लेकर मंथन के दौरान आरआईटी टी और गम्हरिया मंडल भाजपा द्वारा अनंतराम टुडू के नाम का समर्थन किया गया था लेकिन बाद में पार्टी आलाकमान ने गणेश महाली पर ही आस्था दिखाई और उन्हें टिकट दे दिया. उधर लगातार अनंतराम टुडू के समर्थकों की संख्या में इजाफा देखी जा रही है. अनंत राम टुडू आदित्यपुर नगर निगम के मेयर विनोद श्रीवास्तव के काफी करीबी माने जाते हैं. जबकि गणेश महाली को लेकर भाजपा में भी एकमत नजर नहीं आ रहा है. आदित्यपुर मंडल भाजपा और राजनगर मंडल भाजपा पूरी तरह से गणेश महाली के समर्थन में खड़ा है, लेकिन भीतराघात की संभावना प्रबल हो चली है. वैसे आदित्यपुर शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है लेकिन जातीय समीकरण के आधार पर यहां से वोटों का ध्रुवीकरण हो जाता है हार जीत में अंतर पैदा कर देता है. गौरतलब है कि सरायकेला विधानसभा में लगभग साढ़े चार लाख मतदाता हैं जिसमें आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में करीब एक लाख तीस हजार मतदाता हैं.

पुरेन्द्र रहे हैं आदित्यपुर में फैक्टर
राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव और आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायणसिंह आदित्यपुर में हमेशा से भाजपा के लिए एक फैक्टर रहे हैं. वैसे इस बार भी राजद झामुमो और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है और चंपई सोरेन इस बार भी गठबंधन के नेता के रूप में यहां से प्रत्याशी हैं. पुरेंद्र नारायण सिंह जातीय समीकरण बिठाने में माहिर है और यही वजह है कि हर बार वह अपनी जाति का ध्रुवीकरण करने में कामयाब रहे हैं. इस बार भी ऐसा माना जा रहा है कि पुरेंद्र नारायण सिंह चंपई के लिए तुरुप का इक्का साबित होंगे. हालांकि पुरेंद्र ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन गठबंधन धर्म तो उन्हें निभाना ही होगा. वैसे पुरेंद्र नारायण सिंह काफी सुलझे हुए और बेदाग छवि के नेता के तौर पर क्षेत्र में जाने जाते हैं. उनका अपना भी अलग वोट बैंक है.





