जमशेदपुर : सऊदी अरब और कुवैत में दो भारतीय मजदूरों की मौत हो गयी है. ये दोनों मजदूर झारखंड के रहने वाले है. एक मजदूर की मौत 40 दिन पहले हो चुकी है जबकि दूसरे की मौत करीब 20 दिन पहले हुई है. लेकिन अब तक उनका शव स्वदेश नही लौटा है और उनके परिवारवाले अपने प्रियजन के शव का इंतजार कर रहे है. एक मृतक हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित जोबर पंचायत के बनखार्रो गांव का है. 24 मई को वहां के मजदूर धनंजय महतो की मौत हो गयी. इसी तरह 15 जून को दूसरे मजदूर रामेश्वर महतो की मौत कुवैत में हो गयी. बताया जाता है कि धनंजय महतो एक साल से एलएंडटी कंपनी में कार्य करता था और सऊदी अरब में वह निर्माणधीर परियोजना नियोम मेगा सिटी में ट्रांसमिशन लाइन के लिए टावर लगाने का काम कर रहा था. 40 हजार रुपये के वेतनमान पर उनकी हाली हुई थी. 24 मई को वह हमेशा की तरह वीडियो कॉल पर अपनी पत्नी से बाते र रहा था. इसी बीच अचानक उनका मोबाइल गिरकर बंद हो गया. दोबारा कॉल लगाने पर उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया था. कुछ देर के बाद उनके साथ संदेश महतो ने कॉल कर बताया कि उनका पति धनंजय नीचे गिर गये है. (नीचे भी पढ़ें)
उसने बताया कि 24 मई को धनंजय महतो अपने कमरे से बाहर निकलकर सीढ़ियों पर बैठकर जूता पहन रहा था. अन्य साथियों के साथ वे लोग साइट पर जाने के लिए बस में बैठकर धनंजय का इंतजार कर रहे थे. तभी अचानक बाहर हल्ला हुआ कि धनंजय महतो नीचे गिर गये है. इसके बाद वे लोग धनंजय के पास पहुंचे. बताया जाता है कि चार घंटे तक वह गिरा रहा. मां बचाओ कहते कहते उसने चार घंटे के बाद दम तोड़ दिया. 40 दिनों से उनके घर में चूल्हा नहीं जला है. इसी तरह उसी गांव के रहने वाले धनंजय महतो के घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर रामेश्वर महतो भी रहते थे. रामेश्वर महतो कुवैत में आइएमसीओ कंपनी में करीब 12 साल से नौकरी कर रहे थे. 15 जून को उसकी कुवैत के अदान अस्पताल में हो गयी. उनके परिनों ने बताया कि 6 जून से वह अस्पताल में भर्ती था. उसके साथी रामकिशुन महतो ने बताया कि कुवैत के मबूला शहर के एक फ्लैट की छठी मंजिल पर बनी डोरमेट्री के पास रामेश्वर महतो रहते है. 6 जून को वह स्वस्थ्य थे. दोपहर में उन लोगों ने चिकेन पकाया. खाने बैठे ही थे कि अचानक उनका बायां हाथ और पैर काम करना बंद कर दिया. रात 12 बजे तक तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो ग़स्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत होगयी. उसके माता पिता, दोनों बेटे, पत्नी और बहू उनके शव का अब इंतजार कर रहे है. सरकार सिर्फ कहती है कि वे लोग इस मामले में केंद्र सरकार से बातचीत कर रहे है. लेकिन हकीकत है कि शव नहीं आ पाया है.











