गुमला: जिले के डुमरी प्रखंड स्थित अकासी पंचायत में सोमवार को सिरसी-ता-नाले (दोन) कंकड़ों लता राजकीय समारोह का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो, खूंटी विधायक राम सूर्य मुंडा, चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव, ख़िजरी विधायक राजेश कच्छप सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे. कार्यक्रम की शुरुआत देश के वीर शहीदों को नमन करते हुए उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई. इसके उपरांत सभी मुख्य अतिथियों ने सिरसी ता सी नाले में पूजा-अर्चना कर सामूहिक प्रार्थना की.कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने जानकारी देते हुए में कहा कि पहली बार गुमला जिले में इस प्रकार के राजकीय मेले का आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इसे और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा. उपायुक्त ने कुड़ुख भाषा में भी जनसमुदाय को संबोधित किया और आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहरायी.(नीचे भी पढ़े)
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक अधिकारों और उनके उत्थान पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि धर्म समाज को एकजुट करने और शक्ति प्रदान करने का कार्य करता है. इस आयोजन को उन्होंने आदिवासी धर्म और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया. मंत्री लिंडा ने घोषणा की कि सिरसी ता नाले क्षेत्र को आदिवासी तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा और इसे राष्ट्रीय स्तर पर कुंभ मेले की तरह मान्यता दिलाने के प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समाज सदियों से सूर्य, चंद्रमा, धरती, जल, जंगल और प्रकृति की पूजा करता आ रहा है और यही उसकी पहचान का मूल आधार है. उन्होंने सरना धर्म को भारत सरकार से मान्यता दिलाने के लिए चल रहे संघर्ष को जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और कहा कि यह आयोजन उसी दिशा में एक सशक्त कदम है.




