रांची: झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि सदन की कार्यवाही के बीच एक पीड़ादायक परिणाम भी सामने आती है, जिसको आज इस अवसर पर साझा करना आवश्यक हो जाता है. यह देखा जा रहा है कि कई सदस्य अनेक बार अपनी जन प्रतिबद्धता और स्थानीय समस्याओं की अपेक्षा दलगत निर्देशों को प्राथमिकता देने लगते है. जब जनादेश से चुने गये हम सब जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं को पीछे छोड़कर केवल पार्टी के निर्देश का पालन करते है तो यह सदन के लिए, लोकतंत्र के लिए बहुत उचित प्रतीत नहीं होता है. लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा तभी बनी रह सकती है जब प्रत्येक सदस्य अवश्य प्राथमिकता दें. आज यह आग्रह करना चाहूंगा कि दलगत राजनीति से उपर उठकर प्रश्नकाल में जनता की आवाज को प्राथमिकता कम से कम प्रश्नकाल में जरूर दे. उन्होंने कहा कि यहां विटठल भाई के संसदीय अनुशासन को स्मरण करना जरूरी होगा. उनका मानना था कि सदन की शक्ति उसके परम्परा और अनुशासन में है. यदि नियमों का पालन न हो, तो यह केवल बहस का मंच रह जायेगा, न कि एक लोकतांत्रिक संस्था. वह विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन समापन भाषण के साथ साथ सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित भी कर दिया.रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि यह सदन झारखण्ड राज्य के निर्माता, समाज सुधारक, वंचितों, दबे-कुचलों, शोषितों, आदिवासियों के हक हुकूक के लिए हमेशा अपना जीवन न्योछावर करने वाले दिशोम गुरु को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान,भारत रत्न देने का प्रस्ताव सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया.स्पीकर ने सदन के संचालन में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, नेता प्रतिपक्ष एवं अन्य सभी दलों के विधायकों से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया.(नीचे भी पढे)
मानसून सत्र में 324 प्रश्न स्वीकृत हुए
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 1 अगस्त से 7 अगस्त तक था. परंतु बीच सत्र में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के आलोक में 4 अगस्त को सदन स्थगित की गयी. पुनः 22 से 28 अगस्त, 2025 तक के लिए तृतीय (मानसून) पूरक सत्र चलकर गुरुवार को समाप्त हुआ. इस सत्र में कुल 324 प्रश्न स्वीकृत की गयी, जिसमें 107 अल्पसूचित, 183 तारांकित तथा 34 अतारांकित प्रश्न शामिल है. शून्यकाल की कुल 70 सूचनाएं स्वीकृत हुई. कुल 21 निवेदन प्राप्त हुए. कुल 34 ध्यानाकर्षण प्राप्त हुए, जिसमें से 20 स्वीकृत हुए तथा 4 ध्यानाकर्षण सदन में उत्तरित हो पाये. इस सत्र में कुल 34 गैर सरकारी संकल्प प्राप्त हुए.(नीचे भी पढे)
अनुपूरक बजट सहित पांच विधेयक पारित हुए
इस सत्र में प्रथम अनुपूरक बजट, सहित 5 अन्य राजकीय विधेयक, झारखण्ड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, झारखण्ड व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (शुल्क विनियमन) विधेयक, झारखण्ड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, झारखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (विशेष छूट) विधेयक तथा झारखण्ड प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक (निबंधन और कल्याण), विधेयक, 2025 सदन में उपस्थापित किया, तदोपरांत सदन द्वारा पारित किया गया. श्री महतो ने कहा कि प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक विधेयक से झारखण्ड के वर्तमान सरकार का सामाजिक न्याय एवं सामाजिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है. गिग श्रमिकों की पहचान, लाखों युवाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, कानूनी सुरक्षा, प्लेटफॉर्म कम्पनियों की जवाबदेही तय करने के लिए लाये गये विधेयक एवं सदन द्वारा पारित एक मिशाल कायम करेगा. यह विधेयक झारखण्ड के गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं न्यायपूर्ण अवसरों की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा. मैं समझता हूं कि यह कानून अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकता है.
झारखण्ड व्यवसायिक शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन विधेयक राज्य में तेजी से बढ़ती निजी शिक्षा, निजी संस्थानों की फीस संरचना और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बनेगा. झारखण्ड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025 के माध्यम से राज्य के कोचिंग संस्थानों को एक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह ढांचे के अंतर्गत लाने का प्रयास है. इस विधेयक के माध्यम से विद्यार्थियों की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा, शुल्क पर नियंत्रण, गुणवतापूर्ण शिक्षा का वातावरण, मानसिक स्वास्थ्य के साथ डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देगा, जिससे अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा.



