
रांची : झारखंड के राज्यसभा चुनाव में झामुमो और भाजपा की जीत हुई है जबकि कांग्रेस की इस चुनाव में हार हो गयी है. इस जीत और हार के कई सारे मायने लगाये जा रहे है. झामुमो के पास पहले से ही 29 विधायक होने के कारण वह पहले से ही जीत के लिए निश्चिंत थी, लेकिन यूपीए के दूसरे उम्मीदवार कांग्रेस के शहजादा अनवर को हार का सामना करना पड़ा. झामुमो ने अपनी बादशाहत झारखंड में साबित की है और यह भी साबित किया है कि जो यूपीए की सरकार चल रही है, उसके साथ सारे लोग साथ है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की जीत से भाजपा के लिए उत्साहवर्धक है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हारने के बाद यह भाजपा की पहली जीत है. दीपक प्रकाश के लिए काफी मेहनत भाजपा के आला नेता कर रहे थे. भाजपा के लिए राहत की खबर यह आयी कि आजसू उनके साथ ही रही जबकि उनके ही नेता रहे विधायक सरयू राय एक बार फिर से उनके साथ ही नजर आये जबकि एक और निर्दलीय विधायक अमित यादव भी साथ हो गये है यानी सदन में उनकी ताकत और ज्यादा मजबूत हुई है. 81 विधायकों की सीट में 79 विधायक अभी है जबकि एक विधायक बेरमो के राजेंद्र सिंह की मौत हो चुकी है जबकि दुमका की एक सीट खाली है. ऐसे में भाजपा के पास 30 से अधिक विधायकों की ताकत हो गयी है. बाबूलाल मरांडी को भी भाजपा का ही विधायक सदन ने मान लिया है, जो एक और बड़ी राहत लेकर आयी है. वैसे सदन में अब तक श्री मरांडी को विपक्ष का नेता मानने भर का इंतजार है, जिसके बाद सदन में भाजपा और हमलावर होकर सरकार को घेरेगी.
कांग्रेस के हार के मायने
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के हार के कई मायने बताए जा रहे है. इससे झारखंड राज्य का सरकार पर कोई खास असर पड़नेवाला नहीं है. कांग्रेस ने यह मैसेज दिया कि वह अपना उम्मीदवार दे सकता है. कांग्रेस प्रत्याशी को कितना वोट मिला यह मायने नहीं रखता है. कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतार तक अपना वोट बैंक को बरकरार रखा है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दो सीट है और उम्मीदवार तीन है तो किसी एक को तो हार का मुंह देखना ही पड़ेगा. हांलकि शहजादा अनवर का राजनीति इतिहास लंबा नहीं है . वे दो तीन बार रामगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़े है और दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस भी पहले से जानती थी कि उम्मीदवार शहजादा अनवर किसी भी हालत में चुनाव जीतने वाले नहीं है. फिर भी कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी दिया. कांग्रेस अपने संगठन को जमीन स्तर पर मजबूत करने पर जुट गयी. वैसा कांग्रेस आलाकमान को भी मालूम है कि प्रत्येक राज्य में कांग्रेस का संगठन काफी कमजोर है, इसी लिहाजे से कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार देकर संगठन मजबूत करने की योजना बना रही हो, या फिर अपनी जमीनी हकीकत की टोह पता लगाने के लिए यह एक प्रयोग किया गया हो जो भी हो इसके कई मायने लगाए जा रहे है. वैसे सरकार को खतरा है या नहीं, यह सवाल भी उठना लाजिमाी है क्योंकि कांग्रेस हार चुकी है और संभव है कि कांग्रेस नाराज हो जाये क्योंकि सरकार में रहकर भी उनको सिर्फ 18 मत ही मिले है.
यूपीए का अंकगणित
झामुमो: 29
कांग्रेस: 15
राजद: 01
माले: 01
बंधु व प्रदीप- 02
कमलेश सिंह: 01
एनडीए का अंकगणित
भाजपा: 26
आजसू: 02
निर्दलीय अमित यादव: 01
निर्दलीय सरयू राय: 01
रास चुनाव जितने के लिए आवश्यक वोट की संख्या: 27 वोट





