रांची : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए आगामी 18 जून को होने जा रहे मतदान के लिए पार्टियों ने अपने उम्मीदवार की जीत के लिए बिसात बिछाना शुरू कर दिया है. राज्य की वर्तमान सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की अपनी एक सीट पर जीत पक्की दिख रही है, जबकि दूसरी सीट पर फिलहाल तो कांग्रेस एवं भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना दिख रही है. हालांकि यह आकलन राज्य की वर्तमान राजनीतिकि परिस्थितियों को लेकर है, किन्तु राज्य के राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं से इस स्थिति में बदलाव के भी संकेत मिल रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
बता दें कि राज्य में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं. ये दोनों सीटें झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के निधन एवं भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हुई हैं. आगामी 18 जून को होने जा रहे इस चुनाव को लेकर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है. वर्तमान झारखंड विधानसभा में झामुमो सरकार को कुल 56 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें से 34 विधायक झामुमो के हैं. इनके बल पर पार्टी के एक उम्मीदवार की जीत पक्की है, क्योंकि यह चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को कुल 28 विधायकों के मतों की आवश्यकता होगी. इस तरह पार्टी के पास जरूरत से छह अधिक विधायक हैं. इनके बल पर सरकार की सहयोगी कांग्रेस पार्टी दूसरी सीट के लिए बोकारो के प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है. कांग्रेस पार्टी ने झामुमो के छह अतिरिक्त विधायकों के साथ ही सरकार में शामिल अन्य सहयोगी दलों के विधायकों के भरोसे अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है.(नीचे भी पढ़ें)
वहीं दूसरी ओर, विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के राज्य विधानसभा में कुल 24 विधायक हैं. इस प्रकार उसे अपने प्रत्याशी की जीत के लिए केवल 4 और विधायकों का समर्थन चाहिए. प्रदेश में पूर्व के राज्यसभा चुनावों को ध्यान में रखें, तो यहां अंतरात्मा की आवाज के नाम पर पहले से हॉर्स ट्रेडिंग और धन बल के बल पर क्रॉस वोटिंग होती आई है. एनडीए के इसी के भरोसे अपना प्रत्याशी खड़ा किये जाने की चर्चा हो रही है. फिलहाल दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का प्रचंड बहुमत है, जिसके बल पर ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश दावा किया है कि जब विधायकों की पर्याप्त संख्या हमारी सरकार के खेमे के पास मौजूद है, फिर चुनाव को लेकर चिंता या डर का कोई कारण नहीं है. वहीं दूसरी ओर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने विधानसभा में पार्टी के 24 विधायकों की संख्या की चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा यहां से एक स्थानीय प्रत्याशी को खड़ा करेगी, जिसे आसानी से जीत हासिल होगी, क्योंकि राज्य के विधायक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा झारखंड अलग राज्य के गठन और प्रधानमंत्री मोदी के विकास के विजन के नाम पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करेंगे. कांग्रेस के दावों पर तंज करते हुए भाजपा ने सवाल किया कि कांग्रेस झामुमो से मदद की अपेक्षा तो रखती है, किन्तु बिहार, असम एवं बंगाल के विधानसभा चुनावों में उसने झामुमो का समर्थन किया. भाजपा नेता ने इस संदर्भ में वर्ष 2012 में हुए कैश कांड की भी याद दिलाई जिसमें विधायकों में बांटने के लिए लाये जा रहे 2 करोड़ से अधिक रुपये पकड़े गए थे और मतदान ही रद्द कर दिया गया था. (नीचे भी पढ़ें)
वैसे राजनीतिक गलियारों में झामुमो द्वारा राज्य की दोनों ही सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किये जाने की चर्चाएं भी तैर रही हैं. बिहार, बंगाल एवं असम में पार्टी को मिली कांग्रेस की बेरुखी तो मुद्दा है ही, बताया जा रहा है कि सत्तारूढ़ झामुमो सुप्रीमो हेमंत सोरेन राज्य की दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करना चाहते हैं. चर्चा है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की सीट के लिए हेमंत सोरेन अपनी भतीजी जयश्री को उम्मीदवारी दे सकते हैं. हालांकि अपनी भाभी एवं जयश्री की मां सीता सोरेन के भाजपा नेता होने को लेकर इसमें संदेह भी जताया जा रहा है. हालांकि जयश्री ने दावा किया है कि अगर झामुमो उन पर भरोसा दिखाती है तो वे हमेशा पार्टी की वफादार बनी रहेंगी.







