जमशेदपुर : अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान बागबेड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक दिवसीय ‘सीड बॉल मेकिंग कार्यशाला’ का आयोजन किया गया. लड़कियों ने सैकड़ों की संख्या में सीड बॉल तैयार किए. इन सीड बॉल्स को मानसून के दौरान खाली पड़े मैदानों, जंगलों और पहाड़ी इलाकों में फेंका जाएगा. विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर शुक्रवार को नेचर संस्था द्वारा प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए ‘सीड बॉल (बीज गेंद) कार्यशाला’ का भव्य आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में पर्यावरण प्रेमियों, छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. सभी प्रतिभागियों ने मिलकर सामूहिक प्रयास से महज कुछ ही घंटों में सैकड़ों औषधीय, फलदार और छायादार पौधों के सीड बॉल तैयार किए. कार्यशाला की शुरुआत में पर्यावरणविद डॉ कविता परमार और डॉ विनीता परमार ने छात्राओं को सीड बॉल बनाने की विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से समझाया. (नीचे भी पढ़ें)

विशेषज्ञों ने बताया कि मिट्टी, खाद और बीजों के मिश्रण से बनी यह छोटी सी गेंद (सीड बॉल) बिना किसी मानवीय रेख-देख के भी मानसून की पहली बारिश पाकर खुद-ब-खुद अंकुरित हो जाती है. यह कम लागत में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) बढ़ाने का सबसे प्रभावी और आसान तरीका है. इस अभियान के तहत नीम, पीपल, बरगद, जामुन, लीची, इमली और गुलमोहर जैसे स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया गया, ताकि वे स्थानीय जलवायु में आसानी से पनप सकें. तैयार किए गए इन सैकड़ों सीड बॉल्स को आगामी मानसून सत्र में शहर के आस-पास के पथरीले इलाकों, खाली पड़े सरकारी मैदानों, वन क्षेत्रों और बंजर भूमि पर बिखेरा जाएगा. कार्यक्रम के अंत में डॉ विनीता परमार ने सभी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि वे न केवल पौधे लगाएं, बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी लें. कार्यशाला में शामिल सभी लोगों को डॉ कविता परमार ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया जिसमें पेड़ लगाने, पानी बचाने, पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं करने का शपथ दिलाया गया.







