
जमशेदपुर : लॉकडॉउन के बीच मुसलिम समुदाय का पवित्र रमजान महिना चल रहा है. रमजान माह का 15 दिन समाप्त हो चुका है. इस मुकद्दस माह-ए-रमजान का आखिरी अशरा (हिस्सा) (15 मई) 21वें रोजे से शुरू हो जाएगा. रोजेदार एतकाफ यानि एकांत में इबादत करेंगे. इस बार लॉकडाउन की वजह पुरुष और महिलाएं घरों में ही एतकाफ पर बैठेंगी. पहले पुरुष मस्जिदों में एतकाफ पर बैठते थे और महिलाएं घरों में एकांत जगह पर एतकाफ में इबादत करती थीं. मुफ्ती मोहम्मद अबू जफर ने बताया कि एतकाफ का मतलब उस इंसान से है जो अकेले एकांत में अल्लाह की इबादत करता है. तीसरा अशरा, क्योंकि इसी अशरे की पाक रातों में यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रात पाक कुरान शरीफ नाजिल हुई थी. इन रातों में से जिस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुई, उसे शबे कद्र की रात कहते हैं.
14 मई की इफ्तार के बाद एतकाफ
14 मई की इफ्तार कर एतकाफ शुरू होगा. मौलाना बिलाल का कहना है कि हर मोमिन को जिंदगी में कम से कम एक बार एतकाफ पर बैठना चाहिए. एतकाफ पर बैठने से दो हज व दो उमरा का सवाब मिलता है. यह सुन्नते किफाया है यानी एक मोमिन भी मस्जिद में एतकाफ पर बैठता है तो अल्लाह उस पूरी बस्ती से अजाब हटा लेगा. अगर कोई भी शख्स उस मोहल्ले की मस्जिद में एतकाफ पर न बैठे तो पूरी बस्ती के लोग गुनाहगार हो जाते हैं. लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण मस्जिद में केवल 4 लोग ही एतकाफ पर बैठ पाएंगे. वहीं मुफ्ती आबिद हुसैन ने बताया कि अल्लाह जो करते हैं अच्छे के लिए करते हैं. लॉकडाउन ने एक मौका दिया है. इसका फायदा उठाकर अल्लाह को राजी करें ताकि गुनाहों के साथ साथ कोरोना वबा (बला) दोनों दूर हो जाए. इस लॉकडाउन के कारण सभी लोग घर पर ही है. ऐसे में घर-घर से एक व्यक्ति भी अगर एतकाफ पर बैठता है तो पूरे जमशेदपुर में अल्लाह की रहमत रहेगी और सारे अजाब हट जाएगा. हर घर मे न हो तो मोहल्ले में कोई एक ही अपने घर मे एतकाफ पर बैठे. यूँ रमजान का आख़िरी 10 रोजा खास महतव रखता है. इस दस दिन में लोग एतकाफ पर बैठते हैं. कोई 15 रोजा से भी बैठता है, जो एतकाफ में बैठता है, वह ईद के चांद दिखने के बाद ही मस्जिद से बाहर आता है.
एतकाफ के दौरान इन चीजों का ध्यान रखें :
- एतकाफ में बैठने वाले पुरुष या महिला को अपना ज्यादातर वक्त इबादत में गुजारना चाहिए.
- पुरुष केवल मस्जिद में रहकर ही एतकाफ कर सकते हैं, जबकि महिलाएं घर के किसी कोने में पर्दा लगाकर एतकाफ करती हैं.
- एतकाफ में बैठने वाले लोगों को साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए.
- एतकाफ के दौरान किसी की बुराई करने, लड़ाई-झगड़ा करने से बचना चाहिए.
-मौजूदा वक्त में मोबाइल सबकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है, ऐसे में एतकाफ में बैठने वाले शख्स को मोबाइल से भी खुद को दूर रखना चाहिए और पूरा वक्त इबादत में गुजारना चाहिए







