
चाईबासा / चक्रधरपुर : गुजरात के मोरबी जिले से पश्चिमी सिंहभूम जिले के 1188 मजदूर कल देर रात तक अपने-अपने गांव पहुंच गए. ये सभी मजदूर मोरबी में एक टाइल्स कंपनी में मजदूरी करते थे. झारखंड सरकार के प्रयास से मजदूरों की घर वापसी हुई है. मोरबी से टाटानगर तक श्रमिक स्पेशन ट्रेन से सभी मजदूर शाम चार बजे पहुंचे और टाटानगर से चाईबासा 45 बसों से लाया गया, उन्हें लाने के लिए जिले के डीसी-एसपी सहित एक दर्जन अधिकारी टाटानगर गए थे. चाईबासा आने पर सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग की गयी, रजिस्ट्रेशन किया गया. उसके भोजन कराने के साथ उन्हें सूखा राशन भी दिया गया. घर लौटे 1188 मजदूरों में चाईबासा अनुमंडल के ही 900 से अधिक मजदूर थे, जबकि शेष चक्रधरपुर और जगन्नाथपुर अनुमंडल के मजदूर थे. गुजरात से आये मजदूरों ने कोरोना बंदी के दौरान अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि कंपनी ने ख्याल रखना छोड दिया. वे लोग पानी के लिए मोहताज हो गए थे. इन मजदूरों में कई ऐसे दंपति थे कि दोनों काम करते थे. लॉकडाउन में जब परेशानी बढ़ी तो उन लोगों को अपनी मातृभूमि याद आयी और अब दोबारा जाने से तौबा कर रहे हैं. घर लौटे मजदूरों का कहना है कि वे लोग गांव में ही खेती बारी करेंगे. सरकार अपने जिला में ही कोई रोजगार देगी तो उसे करेंगे. लेकिन अब बाहर नहीं जाएंगे.

देश के विभिन्न राज्यों से कोल्हान के मजदूरों की घर वापसी का सिलसिला जारी है. केंद्र और राज्य सरकार के प्रयास से मजदूर सकुशल अपने परिवार सहित गांव लौट रहे हैं. ट्रेन हो या बस सभी मजदूरों को सरकार अपने खर्चे पर ला रही है, रास्ते में उनके खाने-पीने का भी पूरा ख्याल रख रही है, यहां तक घर वापसी के समय मजदूरों को भोजन कराने के साथ सूखा राशन भी दे रही है, ताकि घर पहुंचने भोजन की समस्या नहीं हो. केंद्र और राज्य के इन प्रयासों की कोल्हान के जनप्रतिनिधियों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की है. महिला और बाल कल्याण मंत्री जोबा मांझी, सांसद गीता कोडा, पूर्व सीएम मधु कोडा और चक्रधरपुर के विधायक सुखराम ने केंद्र और राज्य सरकारों के साथ जिला प्रशासन के प्रयासों की जम कर प्रशंसा की है. ये सभी जनप्रतिनिधि कल देर रात तक अपने-अपने क्षेत्र में डटे रहे और गुजरात से आने वाले मजदूरों को उनके गांव तक पहुंचाने में प्रशासन को मदद करते रहे. मंत्री जोबा मांझी और विधायक सुखराम उरांव चक्रधरपुर में डटे थे, तो सांसद गीता कोडा, पूर्व सीएम मधु कोड़ा और विधायक सोनाराम सिंकू जगन्नाथपुर में मौजूद थे.

घर लौट रहे मजदूरों को रोजगार दिलाने की दिशा में सरकार को कार्य करना चाहिए : सांसद
महिला व बाल विकास मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि सरकार ने काफी अच्छा कार्य किया है, दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाया. लोगों को अपने घर में सावधानी से रहना होगा. सांसद गीता कोड़ा ने सरकार के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि बडी संख्या में मजदूर घर वापसी कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की भी दिशा में सरकार को काम करना चाहिए. सांसद ने कहा कि कई राज्य में मजदूरों को घर न जाने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है. उन्हें सरकार जल्द सुरक्षित वापस लाएं. पूर्व सीएम मधु कोड़ा ने कहा कि दूसरे राज्यों से मजदूरों को सुरक्षित लाना काफी चुनौती बडा काम था. जिसे केंद्र और राज्य सरकार के आपसी तालमेल से संभव हुआ है. चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव ने कहा कि जो मजदूर राज्य में आ रहे हैं. उन्हें गांव में ही रोजगार देने के लिए सरकार पहल कर रहे हैं. विधायक ने कहा कि उनके मजदूरों से बात हुई है, लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ है. अब वे लोग घर छोड़ कर बाहर नहीं जाना चाहते हैं. गांव-घर में ही रहकर परिवार चलाएंगे.

चक्रधरपुर में रात 10 बजे हुआ मजदूरों का स्वागत व स्क्रीनिंग, मंत्री जोबा माझी व विधायक सुखराम रहे मौजूद
गुजरात से लौटे मजदूर पोड़ाहाट स्टेडियम में लगभग रात 10 बजे पहुंच गए. यहां पर सभी मजदूरों की अनुमंडल पदाधिकारी प्रदीप प्रसाद की देखरेख में स्क्रीनिंग हुई. यहां मंत्री जोबा मांझी, विधायक सुखराम उरांव के अलावा मेडिकल टीम पहुंची थी. चक्रधरपुर और मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के मजदूरों की एक-एक कर स्क्रीनिंग हुई. साथ ही सभी मजदूरों को मास्क एवं सैनिटाइजर उपलब्ध कराया गया. इसके बाद सभी मजदूरों का हालचाल लेने के बाद चक्रधरपुर से अलग-अलग वाहन में चक्रधरपुर और मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव में भेजा गया. इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी प्रदीप प्रसाद, पुलिस इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार के अलावा अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आरएन सोरेन, रेड क्रॉस सोसाइटी के कृष्ण मोहन प्रसाद ,समाजिक कार्यकर्ता पंकज शर्मा समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे. यहां पर मजदूर चक्रधरपुर विधानसभा और मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के थे. सभी मजदूरों का आने के बाद रजिस्ट्रेशन किया गया, रजिस्ट्रेशन के बाद स्क्रीनिंग और फिर उसके बाद सभी मजदूरों को भेजा गया. रेड क्रॉस सोसाइटी की टीम भी यहां मौजूद थी.







