
रांची : झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में लूट मची हुई है. अब तक 1300 करोड़ से अधिक की लूट हो चुकी है, जिसकी सारी जानकारी झारखण्ड रजिस्ट्रार सहकारिता, रिजर्व बैंक तथा नाबार्ड को है, लेकिन ये सभी धृतराष्ट्र बने हुए हैं द्रोपदी रुपी इस बैंक की अस्मत तार तार हो रही है. वैसे तो घोटालों की लम्बी फेहरिस्त है, जिसे सभी जानते हैं, पर हाल ही में उजागर हुए 50 करोड़ का बिना जरूरत डाटा सेन्टर, सॉफ्टवेयर, ऑटोमेटिक क्लीयरिंग मशीन, पॉश मशीन, माईक्रो टीए खरीद तथा एटीएम खरीद घोटाला से बैंक में हड़कम्प मच गया है. जानकार सूत्र बताते हैं कि बिना जरूरत के डाटा सेन्टर खोलने के नाम पर दो करोड़ रिश्वत लेकर अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक का बोगस भुगतान, बैंक प्रबंधन की मिलीभगत से एक कम्पनी को हो चुका है. डाटा सेन्टर के नाम 2017-18 में एक पूर्व रजिस्ट्रार सह प्रशासक ने एक करोड़ कमीशन खाकर 5 करोड़ का भुगतान एक सॉफ्टवेयर कम्पनी को कर दिया. 2019 में बहती गंगा में तत्कालीन सीईओ ब्रजेश्वर नाथ ने 20 लाख रिश्वत लेकर एक करोड़ का भुगतान उसी कम्पनी को कर दिया. 8 मार्च 2019 को बैंक के महाप्रबंधक दबाव डालकर एक निदेशक ने संचिका पर आदेश देकर तथा अध्यक्ष ने टेलीफोन से दबाव डालकर उसी कम्पनी को तीन करोड़ 76 लाख रुपये का भुगतान करवा दिया. कमीशनखोरी से खरीदे गये 50 करोड़ से अधिक के ये आउटडेटेड सॉफ्टवेयर बैंक के विभिन्न शाखाओं में सड़ रहे हैं. अब तक डाटा सेन्टर का कहीं अता-पता नहीं है.




