
चाकुलिया : झारखंड का सबसे बड़ा पर्व मकर आने से क्षेत्र के लोग जोर शोर से तैयारी में जुट गये हैं. उल्लेखनीय है कि मकर पर्व पर यहां खजूर गुड़ की मांग बढ़ जाती है. क्षेत्र के लोग विभिन्न प्रकार की पीठा और पकवान बनाने में खजूर गुड़ का प्रयोग करते हैं. मकर पर्व के आने से पश्चिम बंगाल के कारीगर झारखंड के विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर खजूर गुड़ का निर्माण करते हैं. इन दिनों चाकुलिया में भी बंगाल के कारीगर खजूर गुड़ बनाने में व्यस्त हैं. बंगाल के कारीगर रोजाना गांव में जाकर खजूर के पेड़ के उपरी हिस्सा पर काटकर हंडी टांगकर खजूर रस संग्रह करते देखे जा रहें हैं. कारीगर पेड़ से खजूर रस संग्रह कर चुल्हा पर रस पकाकर खजूर गुड़ का निर्माण किया जा रहा है.बंगाल के कारीगर ने बताया कि मकर पर्व पर झारखंड में खजूर गुड़ की काफी मांग रहती है जिसकारण वे सभी मकर पर्व के 10-15 दिन पूर्व ही झारखंड में आते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में ही वे खजूर गुड़ निर्माण कर उसे बेचकर काफी लाभान्वित होते है. कहा कि बिहार में जिसतरह मकर पर्व पर तिलकुट और दही चुड़ा का महत्व है, उसी तरह झारखंड में खजूर गुड़ का महत्व है. कहा कि वे सभी रोजाना सुबह 5 बजे से 9 बजे तक ही खजूर गुड़ बनता है.गुड़ बनते ही वे गांव में घुमघुमकर 40-50 रुपये किलो की दर पर खजूर गुड़ को बैचते है.







