
मुंबई: डोगरी भाषा की पहली आधुनिक कवयित्री पद्मा सचदेव का निधन आज सुबह मुंबई में हो गया. वह 81 वर्ष की थी. वह डोगरी के अलावा हिंदी में भी लिखती थीं. मेरी कविता मेरे गीत के लिए उन्हें 1971 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था. सचदेव के परिवार में उनके शास्त्रीय गायक पति सुरेंद्र सिंह और एक बेटी हैं. वह कुछ दिनों से मुम्बई में अपनी बेटी के पास रह रहीं थीं. डोगरी साहित्य जिन रचनाकारों पर गर्व कर सकता है उनमें पद्मा सचदेव का नाम सर्वोपरि है. इनका जन्म जम्मू से 40 किलोमीटर दूर पुरमंडल गांव में हुआ था. राजपुरोहित परिवार में जन्मी पद्मा सचदेव को साहित्य एकेडमी पुरस्कार, सोवियत लैंड पुरस्कार, पद्मश्री सरस्वती सम्मान और साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता से नवाजा जा चुका था.उन्होंने डोगरी लोकगीतों से प्रभावित होकर बारह-तेरह बरस की उम्र से ही डोगरी में कविता लिखना शुरू किया. उन्हें डोगरी की पहली आधुनिक कवयित्री होने का गौरव प्राप्त था .उन्होंने कुछ बरस जम्मू रेडियो के अलावा दिल्ली में डोगरी समाचार विभाग में भी कार्यभी किया था. 1969 में प्रकाशित उनके कविता संग्रह ‘मेरी कविता मेरे गीत’ को 1971 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था.






