
चाईबासा : एक ओर सरकार का प्रयास है कि इस कोरोना काल में कोई अनाज के अभाव में भोजन से वंचित न रह जाये, वहीं चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन रोड़ के रेल राजकीय रेल थाना से महज कुछ ही दूरी पर असहाय वृद्वा अपनी भूख को मिटाने के लिए कराहते हुए कह रही है ‘बाबू दो रुपये दे दो, सुबह से भूखी हूं, कुछ खा लूंगी’ अपने भाग्य को कोसती वृद्धा की कारुणिक पुकार सुन कर वहां पहुंचा तो उनके घर-परिवार के बारे में जानना चाहा. देखा तो वह शारीरिक रूप से इतनी कम जोर लग रही थी कि उनकी एक भी बात को समझना मुश्किल था. पास-पड़ोस से पता चला की ये महिला काफी दिनों से इसी प्रकार यहां पड़ी हुई हैं. होटल आदि ठीक-ठाक चलते समय लोग कुछ खाने को दे ही देते थे, पर लॉकडाउन के कारण इस वृद्धा की मुश्किलें बढ़ गयीं. वह एक तो दाने-दाने का मोहताज है, साथ ही शारीरिक रूप से इतनी लाचार है कि बारिश होते समय एक प्लास्टिक ढांक कर वहीं पड़ी रहती है. जबकि ऐसे बेसहारों, विवशता वालो के लिए चक्रधरपुर नवनिर्मित बस स्टैंड में रैनबसेरा बना हुआ है. लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है. परिणामस्वरूप रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेल पुलिस, जिला पुलिस वालों के लिए कभी-कभी सिरदर्द बन जाती है.







