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national-kisan-andolan-किसान बिल को वापस लेने के बाद भाजपा और सभी विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले-मारे गये किसानों को 3-3 करोड़ मुआवजा दे मोदी सरकार, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा बोले-पीएम मोदी ने दिखायी ”स्टेट्समैनशिप”, मंत्री बन्ना गुप्ता बोले-राजतंत्र हारा, लोकतंत्र जीता, सरयू राय ने कहा-देर से लिया गया सही कदम, पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा-किसानों के हित में लिया गया फैसला, विधायक मंगल कालिंदी ने कहा-भाजपा सरकार के अहंकार की हार हुई, जमशेदपुर में भी मना जश्न

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

नयी दिल्ली/रांची/जमशेदपुर : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल से अधिक समय से चले आ रहे किसानों के आंदोलन के बीच बड़ा फैसला लेते हुए सारे तीनों किसानों के कानून को वापस लेने की घोषणा कर दी. खुले मंच से उन्होंने इसकी घोषणा कर सबको चौंका दिया. इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया आयी है. सभी ने अपने अंदाज में इस फैसले की सराहना की. पक्ष और विपक्ष ने अपने तरीके से इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया :
”आज सुबह-सुबह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने काले कृषि क़ानून को वापस लेने की घोषणा की. यह बहुत ही हास्यास्पद घोषणा है. अब पूरी भाजपा इस प्रचार में लगी है कि प्रधानमंत्री किसानों के हितैषी दिखें. यह बात साबित हुई है कि देश में आज भी लोकतंत्र जिंदा है. हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री तत्काल इस आंदोलन में मारे गए किसानों को 5-5 करोड़ रुपए मुआवज़ा दें और उन्हें शहीद का दर्जा दें. मारे गए किसानों के परिवार के सदस्य को नौकरी दें. उनके ऊपर जो एफआइआर हुए हैं, न्यायालय में मामले लम्बित हैं, उन्हें अविलंब वापस ले. और इतने वक्त तक किसान जो सड़कों पर थे, जो घर-बार छोड़कर बाल-बच्चों के साथ सड़क पर थे, उन देश के सभी किसानों को फसल की क्षतिपूर्ति के लिए 10-10 लाख रुपए दें. साथ ही अविलंब केंद्रीय कृषि मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा.

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा की प्रतिक्रिया :
”सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय”. पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों के हित में और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने का बड़ा निर्णय लिया है. उनकी यह संवेदनशील घोषणा सिर्फ यह दर्शाता है कि उनके लिए प्रत्येक भारतीय के कल्याण के अलावा और कोई विचार नहीं है. उन्होंने उल्लेखनीय “स्टेटसमैनशिप” दिखाया है. मैं प्रधानमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करता हूं. तीन कृषि क़ानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा स्वागत योग्य. विलंब से उठाये गये इस सही कदम के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद. यह प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व के लचीलेपन का प्रमाण है. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता.

राज्य के कांग्रेस मंत्री बन्ना गुप्ता की प्रतिक्रिया :
700 से ज्यादा किसानों की हत्या करने वाली मोदी सरकार ने भारी जनआक्रोश के कारण आगामी चुनावों को देखते हुए ये निर्णय लिया हैं जिसने साबित किया हैं कि तीनों काले कानून सिर्फ प्रधानमंत्री के उद्योगपति मित्रों को खुश करने के लिए लाए गए थे और ये किसानों को गुलामी की ओर ले जाने वाला षडयंत्र था जिसे असफल किया गया हैं. आश्चर्यजनक हैं कि प्रधानमंत्री ने एमएसपी पर कुछ नहीं कहा, इस आंदोलन में शहीद हुए किसानों के लिए कुछ नहीं कहा, आंदोलन से हुए नुकसान के लिए अन्नदाताओं और आम जनता को हुए तकलीफों के लिए कुछ नहीं कहा. देश के किसानों की आय दोगुनी कैसे दोगुनी हो इस पर कुछ नहीं कहा?किसानों की हत्या के लिए जिम्मेदार होने पर भी क्यों स्वीकार नहीं किया ? तीनों काले कानून के लिए जो देश की संसद का बहुमूल्य वक्त और पैसा बर्बाद किया हैं इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? देश के प्रधानमंत्री के जुमलेबाजी और झूठ फरेब की राजनीति का परिणाम हैं कि देश की जनता के साथ ही देश के किसानों को भी प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं रहा हैं इसलिए तो प्रधानमंत्री के घोषणा के बाद भी किसान संगठनों ने कहा कि आंदोलन तब तक खत्म नहीं करेंगे जब तक संसद में लाकर इसे संवैधानिक तौर पर निरस्त न किया जाए. देश ने देखा है कि किस तरह नोटबंदी के नाम पर, काला धन लाने के नाम पर, भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है और झूठ बोला हैं इसलिए ही उनके खिलाफ आज किसानों को उनके घोषणा पर भरोसा नहीं हैं. मैं हमारे नेता राहुल गांधी समेत इस तीनों काले कानून के विरुद्ध आवाज बुलंद करने वाले सभी लोगों और हमारे अन्नदाता किसानों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास.

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रतिक्रिया :
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा के मौके पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कृषि बिल 2021 को लेकर आंदोलित किसानों को बड़ी सौगात दी है. जहां आज उन्होंने कृषि बिल 2021 के तीनों कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है. जिसके बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. देशभर से राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रहे हैं. इस बीच झारखंड के जमशेदपुर में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने पीएम के फैसले को स्वागत योग्य बताते हुए कहा इससे आंदोलित किसानों को राहत मिलेगी. उन्होंने सभी आंदोलित किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर- परिवार के साथ गुरु पर्व मनाने की अपील की साथ ही उन्होंने राज्य के लोगों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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जुगसलाई के झामुमो विधायक मंगल कालिंदी.

झामुमो के जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी की प्रतिक्रिया :
कृषि में सुधार के लिए लाए गए तीनों कानूनों को केंद्र सरकार वापस लेने का ऐलान किया है इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जुगसलाई विधायक मान्य मंगल कालिंदी ने कहा कि भाजपा सरकार के अहंकार की हार हुई है और गुरुपर्व पर यह किसानों के संघर्ष की जीत है. विधायक ने और कहा कि इसके अलावा जो कृषि कानून की लड़ाई में शहीद हुए हैं उनकी शहादत को याद किया जाए और उनके परिजनों को तत्काल राहत राशि दे केंद्र सरकार. अगर केंद्र सरकार पहले ही इस काले क़ानून को वापस ले लेती तो सैकड़ों किसानों को अपनी जान गंवानी नहीं पड़ती. आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी कि किस तरह इस देश के किसानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर किसानी और किसानों को बचाया था. और विधायक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को आने वाले चुनाव उत्तर प्रदेश और पंजाब में करारी हार दिख रही थी जिसको लेकर उन्होंने इस कृषि कानून को वापस लेने का काम किया. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी.

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया :
किसानों के विकास के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सदैव चिंतनशील रही है. चाहे वो किसानों को बीज उपलब्ध करानी हो, सिंचाई की व्यवस्था हो, बाजार की उपलब्धता, फसल बीमा का प्रावधान या फसलों के न्यूमतम समर्थन मूल्य की गारंटी. सरकार हरेक क्षेत्र में किसानों के हितों को ध्यान में रखकर काम करती रही है. इसी श्रृंखला में केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई, कुछेक किसान संगठन इस कानून के पक्ष में नहीं थे, सरकार ने कई संशोधन भी किये, लेकिन किसान नहीं माने. लोकतंत्र में किसी विषय पर टकराहट देशहित में नहीं होता. इन्हीं विषयों को ध्यान में प्रधानमंत्री जी ने तीनों कानूनों को वापस लेने का फैसला किया. साथ ही उन्होंने दोहराया कि किसानों के हित में सरकार पूरी लगन व प्रतिबध्दता से काम करती रहेगी. जनभावना को ध्यान में रखकर इस महत्वपूर्ण फैसले के लिए प्रधानमंत्री का आभार. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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ऑल इंडिया सिख स्टूडेंटस फेडरेशन की ओर से लड्डू वितरण किया गया.

ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन ने बांटी खुशियों में लड्डू
श्री गुरुनानक देव जी के 552 वे प्रकाश पर्व की ख़ुशी के मौक़े एक बड़ी ख़ुशखबरी आयी है की आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने का ऐलान किया है. इस ख़ुशी के मौक़े पर ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के पूर्वी भारत अध्यक्ष सतनाम सिंह गंभीर के नेतृत्व में सदस्यों ने साकची गुरुद्वारा साहिब के सामने में लोगों के बीच मिठाई बांटी. इस दौरान सतनाम सिंह गंभीर ने फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि तीनो कृषि क़ानून रद्द होंगे 700 से ज़्यादा किसान शहीद हो गये उनकी शहादत अमर हो गयी. उनकी शहादत आने वाली पीढ़ी याद रखेंगी की किस तरह देश के किसानो ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर किसान और किसानी को बचाया. इंदर सिंह इंदर अमरजीत सिंह भामरा परमजीत सिंह काले ने कहा कि शहीद हुए किसानो को नमन है. इस दौरान सरबजीत सिंह भुल्लर, इंदरपाल सिंह भाटिया, मनजीत सिंह गिल, गगनदीप सिंह, जगदीप सिंह सैनी, मनप्रीत सिंह, अवतार सिंह, सूरजीत सिंह काले, अमरजीत सिंह रिखराज, गुरदीत सिंह चोला, त्रिलोक सिंह भोला उपस्थित थे. (नीचे देखे पूरी खबर और बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया)

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साकची गोलचक्कर पर खुशी मनाते सिख समुदाय के लोग.

विजय जुलूस में भांगड़ा करते हुए खुशी का इजहार किया, किसान आंदोलन एकजुटता मंच व सिख समुदाय ने बांटे लड्डू
गुरु पर्व पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान के बाद जमशेदपुर में खुशी की लहर दौड़ गयी. आंदोलन से जुड़े हर व्यक्ति ने इस जीत पर पूरे उत्साह के साथ खुशी का इजहार किया है. शुक्रवार का दिन दोहरी खुशी लेकर आया था एक तरफ सिखों के पहले गुरु साहिब श्री गुरु नानक देव जी का 553वां प्रकाश दिहाड़ा मनाया जा रहा था, दूसरी तरफ तीनों किसान बिल की वापसी की घोषणा से पूरा जमशेदपुर से झूम उठा. इस अवसर पर गुरद्वारा सिंह सभा मानगो व किसान आंदोलन एकजुटता मंच के संयुक्त तत्वाधान में एक विजय जुलूस निकाला गया जो साकची गोलचक्कर से शुरू होकर पहले आमबगान रोड तक गया और वापस नौ नंबर टेम्पो स्टैंड में आकर समाप्त हुआ. इस दौरान ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर भांगड़ा नृत्य हुआ. भगवान सिंह, महावीर मुर्मू, गुरदीप सिंह पप्पू, हरविंदर सिंह मंटु, परमजीत सिंह काले, जसवंत सिंह जस्सू जमकर भांगडा किया. भांगडा में आने जाने वाली आम जनता भी शामिल हो गयी. इस दौरान किसानों के समर्थन में नारेबाजी भी की गई. साकची गोलचक्कर पर जनता के बीच सबों का आभार व्यक्त करते हुए लड्डू वितरण किया गया. जमशेदपुर में किसान आंदोलन की अगुवाई करने व आंदोलन को जीवित रखने वाले गुरुद्वारा सिंह सभा मानगो के प्रधान व किसान नेता भगवान सिंह खुशी के आंसू नही रोक पाये. उन्होंने कहा कि यह गुरु महाराज की कृपा और किसानों के संघर्ष का असर है कि गुरुपर्व के मौके पर किसानों को सबसे बड़ी जीत मिली है. भगवान सिंह ने कहा कि आंदोलन से जुड़े प्रत्येक सदस्य को मानगो गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी सम्मानित करेगी. मानगो गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटि व किसान आंदोलन एकजुटता मंच के तमाम सदस्यों में मुख्य रूप से गुरदीप सिंह पप्पू, परमजीत सिंह काले, गुरशरण सिंह, गुरमीत सिंह गिल, केसी मार्डी, गीता सुंडी, जसवंत सिंह जस्सू, सुखविंदर सिंह,सुमित राय, दीपक रंजीत, गौतम बोस, कुमार मार्डी, डॉ राम कविंद्र सिंह, विमल दास चंदना बनर्जी, अजीत तिर्की, सुशांत सरकार, समर महतो, समित कर, जयनारायण मुंडा, विक्रम कुमार, सोनी सेनगुप्ता, सोहन महतो सही बड़ी संख्या अन्य आंदोलनकारी शामिल हुए.

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