
रांचीः अगर आप भी किसी के घर में ताक झांक करते हैं, या फिर किसी का फोन हाथ में आते ही, मैसेज चेक करते हैं या फिर फोटो देखते हैं, बिना किसी की अनुमति के उसकी फोटो लेते हैं. या फिर किसी का पीछा करते हैं तो सावधान हो जाइए. क्योंकि ऐसा करना आपको भारी पड़ सकता है.किसी के भी व्यक्तिगत जीवन में ताकझांक करना, अपराध की श्रेणी में आता है. किसी की भी निजता का हनन करने का अधिकार किसी को भी नहीं है. फिर चाहे वो पति-पत्नी हो, या फिर चाहे सरकार ही क्यों ना हो. (नीचे भी पढ़े)
अगर कोई आपकी निजता का उल्लंघन करता है, अगर आपको ऐसा लगता है, कि कोई बेवजह आपकी जिंदगी में दखल दे रहा है, तो आप इसके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं. हाईकोर्ट के अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल का कहना है कि अब निजता संविधान की धारा 21 का हिस्सा बन गई है. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दी गई है. उन्होंने कहा कि निजता के उल्लंघन का ताजा मामला पेगासस सॉफ्टवेयर को मान सकते हैं. क्योंकि इसके जरिए केंद्र सरकार पर राजनीतिक दल, पत्रकार और दूसरे प्रतिष्ठित लोगों की जासूसी का आरोप लगा है. (नीचे भी पढ़े)
कई लोगों ने इसे अपनी निजता का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. जिसपर कोर्ट ने एक कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए हैं. हालांकि केंद्र ने इसे सुरक्षा और जरूरी कहते हुए ऐसा करने की बात कही थी. इससे पहले निजता को इतनी ज्यादा अहमियत नहीं दी गई थी. साल 1954 में एमपी शर्मा मामले में 8 जजों और वर्ष 1962 में खड़क सिंह मामले में 6 जजों की खंडपीठ ने निजता को मौलिक अधिकार माना था. करीब पांच वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की पीठ ने इसपर सुनवाई करते हुए इसकी व्याख्या की और कहा कि भले ही संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों में निजता का जिक्र ना हो, लेकिन यह जीने के अधिकार और स्वतंत्रता के अधिकार का अहम हिस्सा है. (नीचे भी पढ़े)
क्या है निजता का मामलाः किसी का पीछा करना, फोन टैपिंग करना(चाहे पुलिस या फिर सरकार) यह कहकर नहीं बच सकती है कि सुरक्षा की दृष्टि से फोन टैपिंग की जा रही है. बिना किसी की अनुमति के उसके घर में ताकझांक करना, बिना अनुमति के किसी की तस्वीर लेना. ऐसा करना निजता का उल्लंघन माना जाता है.अनूप कुमार अग्रवाल ने कहा कि किसी की आलोचना करना निजता का उल्लंघन नहीं है. लेकिन यह सीमित दायरे में होना चाहिए. जैसे कि किसी के खिलाफ इंटरनेट मीडिया पर मात्र आलोचना के मकसद से ही पोस्ट होने चाहिए. लेकिन इसमें ऐसी कोई बात न हो जिससे समाने वाले व्यक्ति की निजता का उल्लंघन हो रहा हो.




