नयी दिल्ली: राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह मनोनीत सांसद बने. उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने कक्ष में शपथ दिलाई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया था. हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था. उनकी पार्टी जदयू ने इस बार नाम नहीं दिया था. इसके बाद राष्ट्रपति ने उनका मनोनयन किया. पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद सीट खाली हुई थी. इसे भरने के लिए जदयू के हरिवंश को चुना गया. 69 साल के हरिवंश 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे. राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति तय करते हैं. इन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है. इधर, बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सांसद की शपथ ली. हरिवंश को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था, लेकिन कुछ समय से दोनों के बीच दूरी नजर आई.(नीचे भी पढ़े)
संविधान और राज्यसभा के नियमों के अनुसार मनोनीत सांसद भी उपसभापति बन सकता है. आर्टिकल 89 के तहत राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है. इसमें यह शर्त नहीं है कि सदस्य निर्वाचित ही होना चाहिए. यानी मनोनीत और निर्वाचित, दोनों सदस्य इस पद पर चुने जा सकते हैं. बशर्ते वह राज्यसभा सदस्य हो. उपसभापति का चुनाव राज्यसभा सांसद करते हैं. इसके लिए प्रस्ताव लाया जाता है, जिस पर वोटिंग होती है. सरकार और विपक्ष सहमति से नाम तय करते हैं. साधारण बहुमत से चुनाव होता है. खास बात यह है कि मनोनीत सदस्य भी वोट डाल सकते हैं और उम्मीदवार बन सकते हैं.
हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति (2018–2024)रह चुके हैं. अब वे राष्ट्रपति की तरफ से मनोनीत सदस्य बनाए गए हैं. सहमति बनने पर वे दोबारा उपसभापति बन सकते हैं.



