सरायकेला: कोल्हान की लाइफ लाईन कही जाने वाली सड़क टाटा से कांड्रा- सरायकेला होते हुए चाईबासा के रास्ते ओड़िशा, चांडिल के रास्ते पश्चिम बंगाल और चौका के रास्ते राजधानी रांची जाने वाली सड़क दिनोदिन खस्ताहाल होती जा रही है. बरसात के मौसम में तो इस सड़क पर इतने जख्म भर आए हैं जिसका आंकलन करना भी मुश्किल हो चुका है. (नीचे भी पढ़े)

ऊपर से सरपट दौड़ती तेज रफ्तार गाड़ियां किसी यमदूत से कम नहीं. टाटा- कांड्रा रोड हो या सरायकेला मुख्यालय से चांडिल चौका रोड. हालात बेहद खराब हो चले हैं. विदित हो कि सड़क निर्माता कंपनी जेआरडीसीएल ने 330 करोड़ की लागत से चांडिल- चाईबासा रोड का निर्माण किया है. इसमें सफर करने के लिए राहगीरों को दो- दो जगहों पर टोल टैक्स चुकाना पड़ता है. (नीचे भी पढ़े)

शायद ही कभी ऐसा समय हो जब इस सड़क पर गड्ढे नजर नहीं आएं. बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है मगर जेआरडीसीएल है जिसे ना तो न्यायालय का खौफ है ना ही जिला प्रशासन का. बार-बार उपायुक्त के निर्देश पर भी जेआरडीसीएल के कान में जू नहीं रेंगती. नतीजा बद से बदतर होती जा रही है. इस मामले को लेकर सामाजिक संस्था जनकल्याण मोर्चा ने अनुमंडल कोर्ट में मामला भी दर्ज कराया है, बावजूद इसके जेआरडीसीएल कुंभकर्णी निंद्रा में सोया है. नतीजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है जो आए दिन सड़क हादसे का शिकार हो रहे हैं.




