सरायकेला: जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को महाप्रभु जगन्नाथ के नेत्र उत्सव के साथ- साथ उनके नव यौवन रूप के दर्शन की रस्म पूरी की गयी. प्रभु जगन्नाथ के नेत्र उत्सव सह नवयौवन रूप के दर्शन के अवसर पर पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की. जय जगन्नाथ के जयघोष, शंखध्वनि व पारंपरिक उलध्वनी हुलहुली के बीच चतुर्था मूर्ति के अलौकिक नवयौवन रूप के दर्शन भी हुए. इस अवसर पर पूजा के साथ-साथ हवन भी किया गया. चतुर्था मूर्ति को मिष्ठान्न व अन्न भोग भी चढ़ाए गए. गुरुवार को एक पखवाड़ा के बाद सरायकेला जगन्नाथ मंदिर के खुले पट. बीमारी के कारण 14 दिनों तक मंदिर के अणसर गृह में इलाजरत चतुर्था मूर्ति प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन स्वस्थ होकर नवयौवन स्वरूप में दर्शन दिए. इसे प्रभु का नवयौवन रूप कहा जाता है. ज्ञात हो कि स्नान पूर्णिमा पर 108 कलश पानी से स्नान करने के कारण चतुर्था मूर्ति बीमार हो गए थे. 14 दिनों तक अणसर गृह में प्रभु की गुप्त सेवा की गयी. देशी नुस्खा पर आधारित जड़ी-बूटी से तैयार दवा पिलाकर इलाज किया गया. मंदिर में पूजा के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे थे.



