
सरायकेला : वैश्विक संकट कोरोना को लेकर भले ही केंद्र और राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है, कि लॉकडाउन की अवधि का वेतन किसी भी मजदूर का ना काटा जाए, लेकिन यह अध्यादेश कागजों तक ही सिमट कर रह गया है. झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिला जहां की सैकड़ों छोटी- बड़ी कंपनियां जो पहले से ही मंदी का मार झेल रही थी, लॉकडाउन के बाद स्थिति और भी भयावह हो चुकी है. इन सबके बीच मजदूर हैं, कि उन्हें वेतन चाहिए. निश्चित तौर पर उनकी मांग जायज भी है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर कंपनी मालिक और प्रबंधन मजदूरों को वेतन दे तो कहां से दे. ताजा मामला कांड्रा थाना क्षेत्र स्थित निलांचल इंडस्ट्री पॉवर लिमिटेड का है. जहां आदिवासी कल्याण समिति, मां ठाकुराइन इंटरप्राइजेज और विस्थापित एवं प्रभावित सोसाइटी कंपनी के मजदूरों ने अप्रैल माह से बकाए वेतन की मांग को लेकर कंपनी गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया. आपको बता दें कि तीनों ही कंपनी नीलांचल इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड में ठेकेदारी का काम करती है. इस संबंध में बताया जाता है की लॉक डाउन की अवधि के दौरान कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वेतन दिया, लेकिन इन ठेकेदार के मजदूरों को वेतन नहीं दिया गया. इसको लेकर इन ठेकेदारों के मजदूर आक्रोशित हैं, और इन्हीं मांगों को लेकर कंपनी गेट पर जोरदार प्रदर्शन भी किया. वहीं इस संबंध में इन्होंने कांड्रा थाना पुलिस को लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी है. इसके साथ ही ठेका कंपनी के कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार करते हुए आज से हड़ताल पर जाने का फैसला ले लिया है.






