खरसावां: खरसावां- कुचाई तसर सिल्क मांग विदेशों तक है, लेकिन रासायनिक खाद के अधिक इस्तेमाल से पैदावार पर असर पड़ रहा है. इसलिए एक जिला एक उत्पाद के तहत अब तसर सिल्क की जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए मंगलवार को अग्र परियोजना केंद्र खरसावां में नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन के तहत किसानों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण शिविर का उदघाटन इवेंट्स इंडिया की कोऑर्डिनेटर नचिकेता, कोऑर्डिनेटर अपूर्ण कुमार, एडीआई शिव कुमार आदि ने दीप प्रज्जलिप कर किया. इसमें इवेंट्स इंडिया की कोऑर्डिनेटर नचिकेता ने किसानों को जैविक खेती के लाभ के बारे में बताया गया कि जैविक खेती से उपजी तसर सिल्क और एंड प्रोटेक्टेड की विदेशों में मांग होती है. खरसावां- कुचाई की तसर सिल्क को ऑर्गेनिक का दर्जा प्राप्त है.विदेशों की मांग के आधार पर तसर सिल्क का प्रोडक्शन करेंगे.बेहतर कोकुन बनाकर स्वरोजगार से जुडे.साथ ही ऑर्गेनिक जैविक खेती का प्रमाण पत्र प्राप्त करे.उन्होंने कहा कि तसर सिल्क ग्रामीण इलाकों के आमदनी का स्त्रोत है.हमारा प्रयास किसानों की आमदनी बढ़ाने का है.वही श्री कुमार ने कहा कि खरसावां और कुचाई क्षेत्र में तैयार होने वाले तसर को आर्गेनिक तसर का दर्जा भी मिल चुका है.इस कारण यहां के तसर से बने रेशम के कपड़ों की न सिर्फ देश बल्कि विदेश में भी काफी मांग है.एक समय चीन,जर्मनी व मास्को भी कुचाई सिल्क के दीवाने हुआ करते थे.(नीचे भी पढ़े)
आयात करते थे.विशेषज्ञों ने किसानों की खेती के दौरान आने वाली समस्याओं के हल बताए.वहीं एडीआई शिव कुमार ने कहा कि खरसावां-कुचाई ऑर्गेनिक रेशम उत्पादन के लिये पूरे देश में प्रसिद्ध है.यहां रेशम कीट पालन से लेकर कोसा उत्पादन तक में किसी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं होता है.यहां के ऑर्गेनिक कुकून की भारी मांग है.नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन के तहत खरसावां-कुचाई के किसानों को तसर सिल्क की जैविक खेती पर टिप्स दिया गया.विशेषज्ञो ने जैविक खेती उत्पादित तसर सिल्क की विषाक्त सामग्री को कम करती है. जिससे उपभोग के बाद स्वस्थ स्वस्थ परिणाम प्राप्त होते हैं.खेती की यह विधि मिट्टी को एक साथ बांधती है.जो किसी भी प्रकार के रसायनों और कीटनाशकों से पूरी तरह मुक्त है.इस प्रकार,मिट्टी कम समय में अपनी उर्वरता को बहाल करने में सक्षम है. इस दौरान इवेंट्स इंडिया की कोऑर्डिनेटर नचिकेता, को-ऑर्डिनेटर अपूर्ण कुमार, एडीआई शिव कुमार, डॉ बिकास कुमार, प्रभाकर सिंह, हनुमंत राय, श्यामनंद मिश्रा, पीपीओ के के यादव, पीपीओ अखिलेश्वर प्रसाद, पीपीओ प्रदीप महतो, लक्ष्मण बिरूली आदि मौजूद थे.



