
जमशेदपुर : एमजीएम की बदहाल व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर मंत्री सरयू राय ने एक बार फिर अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के कामकाज की ओलचना की है। प्रधानमंत्री से मिल कर लौटी दासी कर्मकार के सम्मान कार्यक्रम के बाद गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल में मंत्री श्री राय ने कहा कि आठ महीने के लगातार प्रयास के बावजूद एमजीएम की व्यवस्था में एक इंच भी फर्क नहीं पड़ा। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए निर्णय पर भी अमल नहीं हो सका। व्यवस्था बदलाव से संबंधित फाइलें एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई हैं। कर्मचारी व अधिकारियों को काम करने की आजादी नहीं है। अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए तीन चीजों का टेंडर निकाला गया था। दो टेंडर सिंगल हो गया है। मैनपावर आपूर्ति करने वाली एजेंसी के लिए जो टेंडर हुआ है उसमें विभाग से गाइडलाइन मांगा गया है। आखिर क्यों? अस्पताल के अधिकारियों से ज्यादा काबिल लोग रांची में तो नहीं है जो सबकुछ वही निर्णय करें। अस्पताल के टेंडर के लिए लोग क्यों नहीं आ रहे हैं। एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को भी वेतन के लिए हंगामा करना पड़ रहा है। क्योंकि एजेंसी को सरकार से समय पर पैसा नहीं मिल रहा है। मंत्री ने कहा कि फरवरी में उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर एमजीएम और पीएमसीएच धनबाद में तीन-तीन प्रशासनिक पदाधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया था। पर इस संबंध में आज तक फाइल पास नहीं हो सकी, जिस कारण एमजीएम और पीएमसीएच की स्थिति जस की तस है। वहीं तीन नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। पुराने मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को वहां भेज दिया गया है। इससे यहां और डॉक्टरों की कमी हो गई है। स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता है। इसमें बदलाव करने की जरुरत है।



