
Jamshedpur : ग्लोबल स्तर पर छायी मंदी का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर ज्यादा पड़ा है। देश की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स मंदी के चलते कॉस्ट कंट्रोल के लिए बार-बार ब्लॉक क्लोजर ले रही है। चालू वित्तीय सत्र में कंपनी प्रबंधन निर्धारित उन 39 दिन ब्लॉक क्लोजर ले चुकी है।जबकी कंपनी की स्थिति इसके उत्पादन एवं आर्डर जस का तस बना हुआ है। या यूं कहें की इससे और भी भयावह होते जा रही है। इसलिए प्रबंधन यूनियन के साथ मिलकर ब्लॉक क्लोजर की अवधि 39 दिन से बढ़ाने का प्रयास करेंगे। सूत्रों की मानें तो अब अगले सप्ताह ब्लॉक क्लोजर की अवधि बढ़ाने को लेकर सहमति बन सकती है। सोमवार को ऑफिस बेयर्रस के साथ होने वाले रूटिन बैठक में इस संबंध में चर्चा होगी। इसके बाद यूनियन के शीर्ष अधिकारी प्रबंधन के साथ वार्ता कर समझौता कर सकते हैं। हालांकि ब्लॉक क्लोजर अवधि बढ़ाने को लेकर प्रबंधन यूनियन को प्रस्ताव पत्र भेज चुका है। यूनियन के शीर्ष अधिकारियों का भी मानना है कि कंपनी की स्थिति को देखते हुए ब्लॉक क्लोजर की अवधि को बढ़ाना ही होगा। बातों के दौरान यूनियन के अध्यक्ष गुरमीत सिंह तोते ने माना कि कम से कम 15 दिन ब्लॉक क्लोजर की अवधि को और बढ़ाया जा सकता है।प्रबंधन के वार्ता से उनके रुख के स्पष्ट होने के बाद ही तय किया जाएगा। परंतु मजदूरों का हित भी देखा जाएगा।
सात महीनों में 39 दिन रहा ब्लॉक क्लोजर
टाटा मोटर्स में चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल अब तक 39 ब्लॉक क्लोजर लिए जा चुके हैं, यानी बीते अप्रैल माह से अब तक निर्धारित 39 ब्लॉक क्लोजर पूरे कर लिए गए। इस चालू वित्तीय वर्ष में अभी से 5 महीने बचे हुए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी की स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। मंदी का दौर जारी रहेगा। इसका असर उत्पादन तथा उत्पादकता पड़ने के साथ ही आर्डर में कमी आएगी। लिहाजा 5 महीनों में 20 से 25 ब्लॉक क्लोजर हो जाए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।



