सरायकेला: झारखंड में इस बार इंद्र देव जमकर मेहरबान हैं, लेकिन साथ ही सरकारी सिस्टम की लाचारी भी खुलकर सामने आ रही है. यहां हम बात कर रहे हैं टाटा- कांड्रा-सरायकेला मुख्य मार्ग की, जिसे कोल्हान की लाइफ लाइन कहा जाता है. यह एक टोल रोड है, जिस पर चलने के लिए हर वाहन चालक को शुल्क चुकाना पड़ता है. मगर, हकीकत यह है कि हल्की सी बारिश होते ही यह सड़क जलमग्न हो जाती है.(नीचे भी पढ़े)

जलजमाव इतना गंभीर होता है कि राहगीर और वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर इस सड़क से गुजरने को मजबूर हैं. उदाहरण के तौर पर उत्कल ऑटो के समीप सर्विस रोड और मुख्य मार्ग पर बारिश के बाद हालात बदतर हो जाते हैं. जलजमाव के कारण ट्रैफिक थम जाता है और लोग घंटों परेशान रहते हैं. इसका मूल कारण है—जल निकासी की घोर लापरवाही. सर्विस रोड को जगह-जगह खोदकर छोड़ दिया गया है. (नीचे भी पढ़े)
इन हालातों के लिए जिम्मेदार है जेआरडीसीएल यानी झारखंड रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, जो टोल वसूलता है लेकिन सड़क की मरम्मत या जल निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं करता. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार और प्रशासन भी जेआरडीसीएल से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. जनता भी अब इस दर्द को नियति मान चुकी है और चुपचाप सह रही है. सवाल यह है कि जब टोल वसूला जा रहा है तो सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं. कब तक लोग इस टोल रोड पर अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे.



