
जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों का दस दिनों के बाद कोरोना से ठीक हो जाने के बाद भी ड्यूटी जाने के पहले कोरोना का टेस्ट कराना होगा. इसको लेकर सारे चीफ और एचओडी को एक पत्र लिखा गया है, जिसमें यह कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी अगर कोरोना होने के बाद दस दिनों तक होम आइसोलेशन में रहता है और अगर तीन दिनों तक कोई बुखार नहीं आता है तो वह ड्यूटी ज्वाइन कर सकता है, लेकिन उसका पहले रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट) करा लेना चाहिए ताकि जो साथ में काम कर रहे है, उसमें आत्मविश्वास कायम रहे और सारे लोग अपने आपको सुरक्षित रह सके. आपको बता दें कि टाटा स्टील ने भारत सरकार के नये गाइडलाइन के मुताबिक अपने नियम में बदलाव किया था कि कोई व्यक्ति जो कोरोना पोजिटिव हो जाता है और उसमें किसी तरह का कोई लक्षण नहीं पाया जाता है यानी ए-सिम्प्टोमैटिक है तो वह दस दिनों तक होम आइसोलेशन में रह सकता है और तीन दिन तक अगर कोई बुखार नहीं आता है तो उसका टेस्टिंग दूसरी बार कराने की अनिवार्यता नहीं है क्योंकि यह माना जाता है कि दस दिनों के बाद कोरोना पोजिटिव मरीज जिसमें कोई लक्षण नहीं है, उसमें कोरोना का वायरस कमजोर पड़ गया होता है. लेकिन टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से यह आग्रह किया गया था कि कंपनी के शॉप फ्लोर में कार्यरत साथी कर्मचारी थोड़ा सशंकित रहेंगे कि जो व्यक्ति पोजिटिव था, वह फिर से ड्यूटी पर बिना टेस्ट के आ गया है. इसको लेकर असुरक्षा की भावना हो जाती, जिसको देखते हुए यूनियन की ओर से मैनेजमेंट से कहा गया था कि कोरोना पोजिटिव व्यक्ति दस दिनों के बाद अगर ए सिम्प्टोमैटिक रहता है तो उसका टेस्ट करा दिया जाये और फिर उनको ड्यूटी ज्वाइन करने दिया जाये. इसके आधार पर यह टेस्ट की शुरुआत फिर से की गयी है, जिसकी जानकारी टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु को मैनेजमेंट ने दी है.





