
जमशेदपुर : टाटा स्टील की ही कंपनी का एक हिस्सा गम्हरिया स्थित टाटा स्टील ग्रोथ शॉप की अधीकृत यूनियन टिस्को मजदूर यूनियन असंवैधानिक तौर पर संचालित हो रहा है और अब रिटायरमेंट वालों की एक बड़ी फौज एक बार फिर से सत्ता को हथियाने में लगी हुई है. हालात यह है कि जब विरोध की स्थिति सामने आयी है तो आनन-फानन में टिस्को मजदूर यूनियन की कमेटी मीटिंग 4 फरवरी को आहूत कर दी गयी है. इसके साथ ही कमेटी मेंबरों को प्रबंधन से दबाव बनवाने के लिए भी एक बैठक बुलायी गयी है. उक्त बैठक 9 फरवरी को चीफ एचआरएम के स्तर पर ही आहूत कर दी गयी थी, लेकिन अब इसकी बैठक को 8 फरवरी को आहूत की गयी है. आपको बता दें कि टिस्को मजदूर यूनियन का दो रजिस्ट्रेशन है. पहला रजिस्ट्रेशन राकेश्वर पांडेय का है, जिसको टाटा स्टील मैनेजमेंट ने मान्यता दे रखा है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 1583 है, जिसका कार्यकाल नवंबर 2021 को समाप्त हो चुका है. इसका हेड ऑफिस बिष्टुपुर स्थित ओसी रोड यानी राकेश्वर पांडेय का आवास रखा गया है. वहीं, दूसरा रजिस्ट्रेशन शिवलखन सिंह के नाम से है, जो उक्त यूनियन का अध्यक्ष है और उनका रजिस्ट्रेशन नंबर 270/2020 है और उसका हेड ऑफिस वीजी गोपाल स्टडी सेंटर, ग्रोथ शॉप टाटा स्टील रखा गया है. अगर झारखंड सरकार की मानें तो 980 यूनियनों का मान्यता को रद्द किया गया था, जो बिहार से मान्यता प्राप्त है, उसमें राकेश्वर पांडेय की अध्यक्षता वाली यूनियन शामिल है. ऐसे में राकेश्वर पांडेय के रिटायर होने के बाद शिवलखन सिंह ने उनको पटखनी दे दी थी और अपना यूनियन बना दिया था. इस यूनियन को मान्यता नहीं मिली और राकेश्वर पांडेय की अध्यक्षता वाली यूनियन को ही मान्यता मिली और मैनेजमेंट के दबाव के बाद शिवलखन सिंह भी बैकफुट पर आ गये. कालांतर में शिवलखन सिंह रिटायर हो गये और दोनों रिटायर कर्मचारी राकेश्वर पांडेय और शिवलखन सिंह ने हाथ मिला लिया और फिर मिलकर यूनियन संचालित करने लगे. यह कहा गया कि दोनों रजिस्ट्रेशन नंबर 1583 और 270 का समायोजन हो गया है, लेकिन इसको लेकर अधिकारिक कुछ नहीं हुआ. इस बीच जीसी श्रीवास्तव यूनियन के उपाध्यक्ष थे, जो रिटायर हुए और उनको असंवैधानिक बताकर हटा दिया गया. इस बीच टिस्को मजदूर यूनियन का ना तो एजीएम हुआ है और ना ही को-ऑप्सन हुआ है, जबकि संविधान के मुताबिक, अगर कोई बाहरी को अध्यक्ष या कोई पदाधिकारी बनना है तो को-ऑप्सन कराना होता है और एजीएम कराना होता है. यूनियन के तीन पदाधिकारी सेवानिवृत हो चुके है. बताया जाता है कि अब इन विवादों से बचने के लिए टाटा स्टील की तर्ज पर छोटा चांदी का सिक्का कर्मचारियों को दिया जायेगा, जिसके बदले सभी कर्मचारियों से हस्ताक्षर करा लिया जायेगा और उसको आमसभा का रुप दे दिया जायेगा. वैसे आपको बता दें कि जब राकेश्वर पांडेय और शिव लखन सिंह में विवाद चल रहा था, तब राकेश्वर पांडेय ने खुद बयान जारी किया था कि मेरी यूनियन रजिस्ट्रेशन नंबर 1583 ही संवैधानिक है और प्रबंधन भी उसे ही मानती है तथा यह कमेटी अपना पूरा कार्यकाल करेगी जो कि नवंबर 2021 है. इसके लिए टाटा स्टील प्रबंधन द्वारा भी तत्कालीन चीफ कारपोरेट कम्यूनिकेशन कुलविन सुरी द्वारा भी अधिकारिक बयान दिया गया था कि यह यूनियन 270/2020 मान्य नहीं है तथा टीजीएस के लिए सिर्फ राकेश्वर पांडेय का रजिस्ट्रेशन नंबर 1583 वाली यूनियन ही मान्य है. फिर कैसे इसका समायोजन हो सकता है और समायोजन की प्रक्रिया जब नहीं अपनायी गयी तो कैसे हो सकता है. इस बीच यूनियन के महासचिव शिवलखन सिंह ने 4 फरवरी को दोपहर 2.15 बजे वीजी गोपाल स्टडी सेंटर गम्हरिया टीजीएस परिसर में मीटिंग बुला दी है. इस मीटिंग के लिए लोगों को गाड़ी तक मुहैया कराया गया है ताकि सारे लोग हाजिर हो जाये. इसको लेकर रिटायरों की फौज लगातार यूनियन पर कब्जा जमाना चाहता है जबकि जो कर्मचारी कार्यरत है, वे चाहते है कि रिटायर लोग बाहर हो जाये और नये चेहरे यूनियन को संचालित करें. अब सवाल यह उठ रहा है कि जब टाटा समूह और टाटा स्टील में यह तय हो गया है कि रिटायरमेंट के बाद किसी का एक्सटेंशन नहीं होगा, टाटा वर्कर्स यूनियन में को-ऑप्सन नहीं हो रहा है तो फिर ऐसी क्या बात है कि टाटा स्टील के इस यूनियन में रिटायरों की फौज काम करती रहेगी.





