
जमशेदपुर : जमशेदपुर के टाटा स्टील के निबंधित पुत्रों के मामले में एक नया मोड़ आ गया है. एक शिकायत टाटा वर्कर्स यूनियन को सौंपा गया है. इस शिकायत में राजीव कुमार, एस.मंडल, प्रभा, रानी तिर्की,ललित, विकास मुखी, उमाशंकर, एस. ठाकुर, रणधीर, विनोद कुमार, कान्ति लाल, महेश प्रसाद, दिवाकर सिंह, संजीव कुमार सिंह, नवीन, एफ.आलम के नाम है. इस शिकायत से नयी सनसनी फैल गयी है. इस शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2011 के लिखित परीक्षा में पास होने वाले तीन लोग, बारीडीह निवासी कमल किशोर सिंह, भालूबासा निवासी शौरभ कुमार चतुर्वेदी, कदमा निवासी प्रता बेहरा ने “टिस्को निबंधित लिखित पास अचयनित कर्मचारी पुत्र संघ” के नाम से एक संस्था बनाया. फिर इन लोगो ने समाचार पत्रों के माध्यम से हम जैसे लिखित पास कई निबंधितों को टाटा स्टील में रोजगार के साथ उच्च पदों पर नियोजन का झूठा सपना दिखाकर जोड़ा. जब इनके संस्थान में धीरे-धीरे निबंधितों की संख्या बढ़ने लगी तो, इन तीन लोगों ने संस्था के छोटे-मोटे ख़र्च के नाम पर सारे निबंधितों से रुपए की उगाही करने लगे. वर्ष 2012 से लेकर अब तक एक-एक निबंधितों ने इनको लगभग 30-35 हजार (सब निबंधितों का जोड़ा जाए तो लगभग 8-10 लाख) रुपये नियोजन के नाम पर इनको दे दिऐ. इसका पूरा हिसाब उनके साथी कांति लाल के पास बही-खाते में वे सभी लोगों के हस्ताक्षर के साथ उपलब्ध हैं. इन तीन लोगों पर आरोप लगाया है कि उनके नामो और उनके द्वारा इनको दिए गए डॉक्यूमेंट को, इन लोगो ने केवल अपनी संख्या बल दिखाने के लिए टाटा स्टील कंपनी पर किए गए, केस के लिए इस्तेमाल किया. अगर सच मे देखा जाए तो कोर्ट केस में केवल इन तीन लोगो की ही भागीदारी है, अन्य सभी नाम, जो इस केस में है, ये इनके द्वारा अपने मन से गलत तरीके से दिए गए हैं. इन लोगों ने बताया है कि आज जब वे सभी निबंधितों को दोबारा टाटा वर्कस यूनियन के कारण लिखित परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल रहा है. ये तीन लोगों इस लिखित परीक्षा एवं दशको बाद निबंधितों के होने वाले नियोजन को रोकने के लिए हाईकोर्ट जाकर स्टे ऑर्डर लगाने की कोशिश कर रहे है. ये तीन लोगो का निबंधितों के भविष्य के साथ खेलने का केवल दो ही मुख्य कारण है, पहला कारण ये है कि इन तीनों की उम्र 42 वर्ष से अधिक होने के कारण लिखित परीक्षा में शामिल नही हो पाना, दूसरा मुख्य कारण है एक बार उनका नियोजन हो जाता है, तो इन तीनों के आय का स्रोत बंद हो जाएगा. ये तीन लोग अपने निजी स्वार्थ के कारण हजारों निबंधितों के भविष्य के साथ खेल रहे है. इन सारे लोगों ने कहा है कि वे सभी निबंधित जो इनके साथ बस रोजगार की चाह में जुड़े थे और आज फिर एक साथ इन तीनों के खिलाफ ठगी, पैसे की उगाही और नियोजन के नाम पर टाटा स्टील जैसे प्रतिष्ठित कंपनी का नाम खराब करने के लिए, कानूनी मार्ग अपनाने का विचार कर रहे है.





