
जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव को अवैध बताने के लिए श्रम विभाग और ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार के पास दायर शिकायत सह याचिका को खारिज कर दिया गया है. करीब दो दिनों तक चली सुनवाई के बाद तीसरे दिन अंतिम सुनवाई के बाद श्रमायुक्त सह ट्रेड यूनियन के रजिस्ट्रार एसएस पाठक की ओर से फैसला सुनाया गया और इसको लेकर दायर याचिका सह शिकायत को गलत पाया और इसको खारिज कर दिया. शिकायत को खारिज करने के साथ ही टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी समेत तमाम 11 पदाधिकारियों और 214 कमेटी मेंबरों के चुनाव को सही मानते हुए रजिस्टर बी में भी दर्ज कर लिया गया. इस तरह टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु और महामंत्री सतीश सिंह की जोड़ी ने रांची में तीन दिनों तक कैंप करने के बाद अपने विरोधियों को जबरदस्त पटखनी दे दी है और विरोधियों को एक तरह से परास्त कर दिया है. इस दौरान जितनी भी शिकायतें चुनाव को लेकर दायर किया गया था, वे सारे शिकायतों के काट में दस्तावेजी प्रमाण इन दोनों द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद चुनाव को श्रम विभाग ने सही माना और इसको मान्यता देते हुए रजिस्टर बी में चुनाव में चुने गये पदाधिकारियों के नाम को दर्ज कर लिया. आपको बता दें कि रजिस्टर बी में दर्ज होना चुने गये यूनियन के लिए अनिवार्य होता है और यह एक तरह से श्रम विभाग की मंजूरी के समान होता है. फैसला आने के बाद अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु ने कहा कि न्याय मिल गया. सही तरीके से चुनाव कराया गया था, लेकिन कुछ लोग बेवजह इसको विवाद में डाल रहे थे. उन्होंने कहा कि श्रम विभाग से फैसला आने की खुशी ऐसी मिली है कि जैसे चुनाव जीतने के बाद भी नहीं मिली थी. महामंत्री सतीश सिंह ने कहा है कि यह मजदूरों की जीत है. जिन लोगों ने सच का साथ दिया था, उसकी जीत है और सच की जीत होती है, यह सुना था और आज चरितार्थ भी हुआ कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं और आज जीत हुई है.
क्या है पूरा मामला : टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव हुआ था. यूनियन के पूर्व सहायक सचिव जे आदिनारायण, अनिल कुमार सिंह और सुनील कुमार सिंह ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार से शिकायत दर्ज कराई थी. उप श्रमायुक्त राजेश प्रसाद ने शिकायतों की जांच कर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को सौंप दिया था. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार ने मंगलवार को शिकायतकर्ताओं को और गुरुवार को अध्यक्ष तथा महामंत्री को पक्ष रखने के लिए तलब किया था. दो दिनों तक लगातार सुनवाई हुई और शुक्रवार को अंतिम सुनवाई हुई. हालांकि चुनाव के दौरान रजिस्ट्रार ने खुद यूनियन अध्यक्ष व चुनाव पदाधिकारी को निर्देश दिया था कि आपत्तियों का निपटारा कर ही चुनाव कराएं. उस दौरान चुनाव पदाधिकारी ने डीएलसी को जवाब सौंपते हुए यह कहा था कि चुनाव रोकने का अधिकार उनके पास नहीं है. वहीं चुनाव पदाधिकारी के जवाब पर डीएलसी ने शिकायतकर्ताओं से उनका पक्ष लिया जिसमें उन्होंने बिना आपत्तियों के निष्पादन के चुनाव कराने की अपनी शिकायत को दोहराया व चुनाव पदाधिकारी के जवाब पर असंतोष जताया था. इस वजह से चुनाव के करीब छह माह बीत जाने के बाद भी अब तक यूनियन रजिस्टर बी में दर्ज नहीं हो सका था. इसके बाद दो दिनों के बाद तीसरे दिन यह सुखद खबर आयी और रजिस्टर बी में यूनियन की वर्तमान कमेटी को मंजूरी दे दी.
झारखंड हाईकोर्ट पर अब सबकी नजर, केस पेंडिंग है
टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव की वैधता को लेकर अभी हाईकोर्ट का चक्कर भी है. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार और डीएलसी को चुनाव की वैधता को लेकर की गयी शिकायत के साथ ही हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गयी है. इसके तहत कर्मचारी सुनील कुमार सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 19 मार्च को ही एक याचिका दायर की गयी है, जिसकी सुनवाई अभी पेंडिंग है. इसमें ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार, श्रमायुक्त, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष और निर्वाची पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह को पार्टी बनाया गया है. इसकी सुनवाई हाईकोर्ट में पहले जस्टिस आनंद सेन कर रहे थे, लेकिन चूंकि वे टाटा स्टील और टाटा वर्कर्स यूनियन से संबंधित कई केस अधिवक्ता रहते हुए जस्टिस आनंद सेन देख रहे थे, इस कारण उन्होंने इस केस में सुनवाई से इनकार करते हुए चीफ जस्टिस को केस रेफर कर दिया था.






