चक्रधरपुर:पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थित सरकारी क्वार्टरों की जर्जर हालत कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते है. भवन निर्माण विभाग, भवन प्रमंडल चाईबासा के कार्यपालक अभियंता की ओर से वर्ष 2018 में ही प्रखंड परिसर स्थित बी टाइप के तीन ब्लॉक के 12 क्वार्टरों को जर्जर घोषित कर दिया गया था. इसके बावजूद इन भवनों को अबतक नहीं तोड़ा गया है. स्थिति यह है कि दिन भर स्कूली बच्चे इस क्वार्टर में खेलते देखे जा सकते है, वहीं शाम ढलते ही शराबियों का अड्डा बन जाता है. शराबी यहां बैठक कर शराब पीते रहते है, जिस कारण जर्जर क्वार्टर में शराब की खाली बोतलों के अलावा डेनड्राइट आदि मादक पदार्थ बिखरे हुए नजर आते है. विभागीय अधिकारियों द्वारा 12 सितंबर 2018 को भवन प्रमंडल चाईबासा एवं भवन अवर प्रमंडल चक्रधरपुर के अभियंताओं ने संयुक्त रूप से तीनों बी टाइप आवासों का निरीक्षण किया था. (नीचे भी पढ़े)

निरीक्षण में पाया गया था कि सभी तीनों ब्लॉक जर्जर स्थिति में हैं. भवन की छत से पानी का रिसाव होता है, प्लास्टर झडकर गिर रहे तथा छत की सीलिंग में भी जगह-जगह लोहे के छड़ दिखाई देने लगे. कई स्थानों पर छज्जे भी गिरने की स्थिति में है. पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि इन भवनों के कारण कभी भी दुर्घटना हो सकती है. इसी आधार पर कार्यपालक अभियंता ने तीनों बी टाइप ब्लॉकों को कंडम (जर्जर एवं अनुपयोगी) घोषित करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा था. करीब आठ वर्ष पुराने इस विभागीय आदेश के बावजूद यदि भवनों का उपयोग या उनके आसपास लोगों की आवाजाही बनी हुई है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. स्थानीय लोगों ने जर्जर भवनों को हटाने या सुरक्षित करने की मांग की है, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके.




