
चाईबासा: शुक्रवार को वन पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण समिति के अध्यक्ष हरिचरण साण्डिल के नेतृत्व में विस्थापितों और शिक्षित बेरोजगारों ने टाटा स्टील नोवामुंडी के जीएम आफिस के समक्ष विभिन्न मांगों को लेकर धरना- प्रदर्शन किया. जिसमें टाटा स्टील के प्लांट द्वारा गांव पदापहाड़ और मौहदी में लाल पानी, लाल मिट्टी और बरसात के दिनों में जहरीले तेल पानी में बहाकर आता है जिससे खेत, खलिहान बर्बाद हो रहें हैं. टाटा स्टील इसके लिए जिम्मेदार हैं. पानी पीने से मानव जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया है साथ ही मवेशियों को पानी पीने से मार जाते हैं. लेकिन टाटा स्टील को प्रत्र देने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं करती हैं. टाटा स्टील न तो मुआवजा और न ही नौकरी देती हैं. जिससे स्थानीय ग्रामीणों टाटा स्टील के प्रति रोष उत्पन्न हो गया. टाटा स्टील ने ग्राम कोड़ता के विस्थापितों को अब तक न नौकरी दिया न ही मुआवजा दिया है. जिससे लोगों में रोष है. इस अवसर पर कोड़ता के मुंडा जूनू हेम्ब्रम, गेड़े हेम्ब्रम, सरस्वती हेम्ब्रम, संदीप दास, विशाल मुंडा, विरेन्द्र पूर्ति, मनोज पान,प्रभात साण्डिल, सोनाराम चातोम्बा, लखन नाग, सुनील नाग, चन्द्र मोहन केराई, बनमली गोप, अनुज रजक,भीम प्रसाद, एम डी जाकरिया, हाथीराम बोबोगा, सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे. वन सरक्षण समिति द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि अगर विस्थापितों और स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों को नौकरी और मुआवजा नहीं मिला तो आगामी 6 नवंबर को टाटा स्टील नोवामुंडी माइन्स के रेलवे साइडिंग का घेराव किया जाएगा







