
चाईबासा : हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुवा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोडा़ व सांसद गीता कोडा भी बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ शहीद बेदी पर पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले उन्होंने भगवान बिरसा के स्मारक पर माल्यार्पण किया. अपने संबोधन में मधु कोड़ा ने कहा की गुवा का आंदोलन जल, जंगल, जमीन के लिए हुआ था। आंदोलनकारियों पर बर्बरतापूर्ण गोली चला कर उन्हें शहीद कर दिया गया था। गुवा के शहीदों समेत झारखंड के तमाम शहीदों की शहादत की बदौलत ही झारखंड अलग राज्य मिला लेकिन अभी लड़ाई और भी बाकी है। झारखंड राज्य अलग होने का सपना तभी साकार होगा जब झारखंड का कोई भी युवा बेरोजगार नहीं होगा। झारखंड के सारे लोगों को इज्जत और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलेगा। इसी संकल्प के रूप में आज के दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। पूर्वजों के बलिदान को हम बेकार नहीं जाने देंगे और पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ झारखंड की सेवा करेंगे। (नीचे भी पढ़ें)

शहीद स्थलों को विशेष दर्जा मिले : गीता कोड़ा
सांसद गीता कोडा़ ने कहा कि अलग झारखंड, झारखंड का अस्तित्व और पहचान बचाने के लिये आज के दिन कई निर्दाेष लोगों ने अपनी शहादत दी थी। झारखंड अलग राज्य तो बन गया लेकिन झारखंड को आज भी और आगे ले जाने की जरूरत है। झारखंड के लोगों ने कई सपने एवं उम्मीदों के साथ अपनी आहुति दी और प्राण त्यागे थे।उनको तभी सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी जब झारखंड आगे बढ़ेगा, नौजवानों के हाथ में रोजगार होगा, झारखंड के बच्चे शिक्षित होंगे. तभी हम सुनहरा झारखंड की परिकल्पना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार से मांग करेंगे कि झारखंड के तमाम शहीद स्थलों को विशेष दर्जा एवं प्राथमिकता देते हुए शहीद स्मारक के रूप में विकसित किया जाए जहां से लोग झारखंड के संघर्ष और इतिहास की कहानी को याद कर सकें। झारखंड के वीर शहीदों को पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाए ताकि बच्चे उनके इतिहास को जान सकें। (नीचे भी पढ़ें)

शहीदों की शहादत से झारखंड अलग राज्य मिला : सोनाराम सिंकू
विधायक सोनाराम सिंकू ने कहा कि हम जब विधायक नहीं थे तब भी शहीदों का सम्मान करते थे और आगे उनके सपनों को साकार करेंगे। हम खुद भी आंदोलनकारी रहे है। शहीदों की शहादत से झारखंड अलग राज्य मिला। वहीं आदिवासी हो सभा-महासभा ने 50 से अधीक कि संख्या में चाईबासा से मोटरसाईकल रैली निकाल सभा स्थल पर पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा अन्य महिला संगठनों आदि ने पारम्परिक ढोल-मांदर के साथ नृत्य प्रस्तुत किये।













