
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी थाना झेत्र के माटागुट्टु निवासी श्याम देवगम हत्याकांड से पुलिस ने शनिवार को पर्दी उठा दिया. मामले में यह बात समाने आयी कि श्याम देवगम के साथियों ने ही आपसी विवाद को लेकर उसे शराब पिलाकर पहले गला घोंट कर हत्या कर दी. फिर उसके हाथ-पैर बांध कर माटागुट्टु रेलवे ट्रैक के पास जमीन में गाड़ दिया. पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्तों के निशानदेही पर शव बरामद कर लिया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल के पोस्मार्टम हाउस भेज दिया गया है. मामले की जानकारी पुलिस ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में दी. पुलिस ने बताया कि श्याम के भाई सूरज देवगम के बयान पर 13 नवंबर को मामला दर्ज किया गया था. सूरज ने पुलिस को बताया था कि उसका भाई सोमवारी बिरुली के घर पर रह कर बिजली विभाग में ठेकेदारी में काम करता था. अगस्त माह से वह गायब था. काफी खोजबीन करने पर भी वह नहीं मिला. उसके बाद 13 नवंबर को थाने में मामला दर्ज किया गया. मामला दर्ज होते ही पुलिस अधीक्षक के द्वारा एक टीम का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व एसडीपीओ अमर कुमार पांडेय कर रहे थे. जांच में पुलिस ने पाया कि घटना के दिन स्थानीय निवासी चंदन बिरुली ने श्याम को आखिरी बार फोन किया था. पुलिस द्वारा सख्ती से पूछताछ करने पर मामला सामने आ गया. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मकान मालिक सोमवारी बिरुली का पति दिलीप बिरुली हत्या के एक मामले में जेल में बंद है. जेल के अंदर से ही दिलीप चंदन को मारने की धमकी देता था.

वहीं श्याम दिलीप की जमानत के लिए हर संभव प्रयास कर रहा था. साथ ही चंदन ने श्याम को गांव की युवतियों के साथ गलत करता देख लिया था, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद हो गया था. इसी बात को लेकर 13 अगस्त को चंदन ने श्याम को फोन कर शराब पीने के लिए बुलाया था. चंदन के साथ विजय हेंब्रम उर्फ चांगो, पल्टन हेंब्रम, परगना बिरुली और प्रदीप बिरुली थे. सभी पांडू बिरुली के घर गये और देशी शराब पी. वहां सभी ने श्याम को काफी शराब पिलाई, जब वह बेहोश हो गया तो रस्सी से उसका गला घोंटकर उसे मार दिया. बाद में शव को माटागुट्टु रेल लाइन के किनारे जमीन में गाड़ दिया. पुलिस ने जब मौके पर जाकर खुदाई की तो वहां से श्याम का कंकाल बरामद किया. इस मामले में पुलिस ने चंदन बिरुली और विजय हेंब्रम को गिरफ्तार किया है. वहीं इस मामले में बाकि अभियुक्त फरार हैं. छापामारी दल में एसडीपीओ अमर कुमार पाण्डेय, एसआई नागेन्द्र ओझा, प्रशिक्षु एसआई अविनाश कुमार, एएसआई तारणी प्रसाद सिंह, एएसआई सुनील कुमार सिंह, पुलिस चालक हवलदार अर्जुन सिंह के साथ सशस्त्र बल शामिल थे.






