रामगोपाल जेना/चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी प्रखंड अंतर्गत मझगांव डिग्री कॉलेज का आज रामहरि गोप के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने निरीक्षण किया. निरीक्षण में कॉलेज की शैक्षणिक, प्रशासनिक और बुनियादी स्थिति को लेकर कई गंभीर कमियाँ सामने आईं. (नीचे भी पढ़ें)

प्रतिनिधिमंडल ने निरीक्षण के दौरान पाया कि हो बहुल क्षेत्र होने के बावजूद मझगांव डिग्री कॉलेज में हो भाषा की पढ़ाई ठप पाई गई, जो हो समुदाय की भाषा-संस्कृति की घोर उपेक्षा का नमूना है. इसके अलावा लाइब्रेरी, शौचालय, पेयजल व सुंदर फर्नीचर तो मौजूद हैं, मगर लाइब्रेरी में किताबें नहीं, फर्नीचर केवल शोभा की वस्तु बने हुए हैं. प्रबंधन और संचालन पूरी तरह निष्क्रिय है. कॉलेज में पढ़ाई में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों का मजाक उड़ाये जाने, उन्हें हतोत्साहित किये जाने की स्थिति सामने आई जो गंभीर चिंता का विषय है. प्रशासनिक जवाबदेही नहीं के बराबर मिली जिससे स्पष्ट है कि कॉलेज पूरी तरह उपेक्षित है. निरीक्षण दल में शामिल प्रमुख लोगों में अधिवक्ता रमेश जेराई, समाजसेवी गुरा सिंकू एवं रेयांश सामड शामिल रहे. (नीचे भी पढ़ें)

रामहरि गोप ने कहा कि कॉलेज की इमारत तो बनी है, लेकिन शिक्षा की आत्मा शिक्षक, किताबें और माहौल सब कॉलेज से गायब हैं. उन्होंने कहा कि कॉलेज में ‘हो’ भाषा की पढ़ाई नहीं होना, सांस्कृतिक अपराध और विद्यार्थियों का मजाक बनाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. निरीक्षण के पश्चात निरीक्षण दल ने कॉलेज में तत्काल पर्याप्त संख्या में प्राध्यापकों की नियुक्ति किये जाने, ‘हो भाषा की पढ़ाई तत्काल शुरू कराए जाने एवं इसके लिए भाषा के विशेषज्ञों की नियुक्ति किये जाने एवं कॉलेज लाइब्रेरी में पर्याप्त संख्या में किताबें उपलब्ध कराने के साथ ही कॉलेज में जरूरी सुविधाओं को सक्रिय किये जाने के साथ ही प्रशासनिक निगरानी बढ़ाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किये जाने जैसी मांगें रखीं. उन्होंने कहा कि उक्त समस्याओं का शीघ्र यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यह विषय जन आंदोलन का रूप लेगा, और पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.



